मंत्रालय ने बताया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ग्लेशियरों के पिघलने का अध्ययन कर रहा है। 76 ग्लेशियर के सिकुड़ने या खिसकने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।
संसद की एक स्थायी समिति को जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने बताया कि हिमालय के ज्यादातर ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो आगे चलकर बड़ी तबाही की वजह बन सकते हैं। खासतौर पर हिमालय और करीब 2500 किली लंबे गंगा के बहाव क्षेत्र में बड़ी आपदाएं आ सकती हैं।
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देश में ग्लेशियरों के प्रबंधन को समिति ने सरकार से जवाब मांगा था। इसे लेकर केंद्रीय जल संसाधन व नदी विकास मंत्रालय ने बताया कि ग्लेशियरों के पिघलने में तेजी की वजह से बादल फटने व व्यापक स्तर पर भूस्खनल जैसे संकट आ सकते हैं। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ग्लेशियरों के पिघलने का अध्ययन कर रहा है। 76 ग्लेशियर के सिकुड़ने या खिसकने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।
मंत्रालय ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के किसी भी प्रभावों की ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से न केवल हिमालयी नदी प्रणाली का प्रवाह गंभीर रूप से प्रभावित होगा, बल्कि यह ग्लेशियर झील के फटने, ग्लेशियर हिमस्खलन, भूस्खलन आदि जैसी आपदाओं को भी जन्म देगा। एजेंसी