कांग्रेस पार्टी की इच्छा है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह के बेटे, राज्य सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह मंडी से लोकसभा का चुनाव लड़ने की हामी भर दें। खबर है कि विक्रमादित्य सिंह भी चुनाव लड़ने का जोश भर रहे हैं। उनकी मां प्रतिभा सिंह ने पिछला चुनाव मंडी से ही जीता था। पिछले कुछ दिनों से अपने तेवर से विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा की मंडी से प्रत्याशी और अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ा रखी है। मंडी में वैसे भी वीरभद्र सिंह के परिवार की पकड़ काफी मजबूत है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने की पहल
इस बारे में कई प्रयास के बाद अभी विक्रमादित्य सिंह से बात नहीं हो पाई है। विक्रमादित्य हिमाचल के युवाओं में अपनी पकड़ रखते हैं। उनके प्रत्याशी के रूप में उतरने पर मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि विक्रमादित्य को हिमाचल में मंडी से चुनाव लड़ाने की पहल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने की है। माना जा रहा है कि विक्रमादित्य के चुनाव में उतरने के बाद कांग्रेस को भविष्य की कई पेचीदगियों को सुलझाने में मदद मिलेगी। हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि विक्रमादित्य की उम्मीदवारी को लेकर अभी मामला विचार के स्तर पर है। कांग्रेस पार्टी के एक प्रक्रिया के तहत प्रत्याशी को अंतिम रूप देती है। इसलिए प्रत्याशियों की सूची का इंतजार कीजिए। सूत्र का कहना है कि इस सप्ताह के अंत तक मंडी के प्रत्याशी के बारे में सूचना मिल सकती है। प्रतिभा सिंह ने भी विक्रमादित्य के मंडी से चुनाव लड़ने की बात कही है। इससे पहले कांग्रेस की मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह ने इस बार वहां से चुनाव लड़ने में अनिच्छा जाहिर की थी।
भाजपा साध रही है अपने बागियों को
2022 के विधानसभा चुनाव में हिमाचल में बागियों ने भाजपा की किरकिरी कर दी थी। मंडी से भी भाजपा के नेता बागी हुए थे। अब भाजपा ने कंगना रनौत को प्रत्याशी बनाया है। वह क्षेत्र में प्रचार कर रही हैं। भाजपा के दिल्ली के रणनीतिकारों के लिए मंडी की सीट काफी अहम है। इसलिए भाजपा ने 2022 में पार्टी छोड़कर बागी हुए नेताओं की घर वापसी का प्रयास तेज कर दिया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के लिए भी मंडी की सीट नाक का सवाल बन रही है। प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह भी चाहते हैं कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी की हार के बाद हुई किरकिरी को संभाला जा सके। दूसरे विक्रमादित्य के चुनाव जीत कर लोकसभा में आने के बाद वीरभद्र परिवार के लिए कांग्रेस पार्टी में आगे की राजनीति काफी अच्छा नतीजा दे सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कांग्रेस के दिग्गज और अच्छे नेताओं में थे। उनका गांधी परिवार से खास रिश्ता था। इस अहमियत को कांग्रेस के नेता भी खूब समझते हैं।