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Himachal: कांग्रेस ने सुक्खू फैक्टर से साध लिए हैं कई चुनाव! ऐसे भुनाई जाएगी जमीन से जुड़ी छवि

सार

कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि वीरभद्र की विरासत को दरकिनार कर जिस तरीके से एक जमीन से जुड़े नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी गई है, वह राजनीतिक रूप से न सिर्फ पार्टी को स्थापित करेगी बल्कि नई कांग्रेस की परिभाषा को भी बताएगी।
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भूपेश बघेल व हुड्डा के साथ सुखविंदर सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में बने नए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के माध्यम से कांग्रेस अब आने वाले विधानसभा के चुनावों में एक साथ कई निशाने साधेगी। जिसमें लंबे समय से सत्ता में बने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के परिवार से किसी को मुख्यमंत्री ना बनाया जाना तो शामिल ही होगा बल्कि नए मुख्यमंत्री सुक्खू के पीसीओ वाले से लेकर दूध बेचने वाले तक के सफर को आने वाले विधानसभा के चुनावों में सकारात्मक तौर पर जमकर प्रचारित भी किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि वीरभद्र की विरासत को दरकिनार कर जिस तरीके से एक जमीन से जुड़े नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी गई है, वह राजनीतिक रूप से न सिर्फ पार्टी को स्थापित करेगी बल्कि नई कांग्रेस की परिभाषा को भी बताएगी।
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सुखविंदर सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में पहली बार लीक से हटकर कांग्रेस ने कुछ ऐसा किया है जो सिर्फ हिमाचल ही नहीं बल्कि कई राज्यों में एक मजबूत संदेश देगा। राजनैतिक विश्लेषक बनवारी लाल शर्मा कहते हैं कि हिमाचल में सुखविंदर सिंह सुक्खू का मुख्यमंत्री बनाया जाना कितना असर करेगा यह तो आने वाले पांच सालों में तय होगा। लेकिन एक बात बिल्कुल तय है कि जिस तरीके से कांग्रेस ने लीक से हटकर एक मुख्यमंत्री हिमाचल में बनाया गया है वह कांग्रेस के लिए अन्य राज्यों में एक मिसाल के तौर पर पेश किया जाएगा। शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस ने ऐसा करके रणनीति के तौर पर एक साथ कई निशाने भी साधे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सिर्फ एक परिवार या एक व्यक्ति और उसकी विरासत के सहारे राज्य की सत्ता नहीं चलाई जाएगी। सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अगर इस मुद्दे को बेहतर तरीके से अन्य राज्यों में स्थापित कर पाई तो उसके लिए कांग्रेस की एक नई परिभाषा भी होगी और सियासी फायदा भी होगा।

सुखविंदर सिंह सुक्खू - फोटो : संवाद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि हिमाचल में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले रविवार को कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ इस बात को लेकर चर्चा भी हुई है। हालांकि अभी पार्टी का पूरा फोकस हिमाचल में शपथ ग्रहण और नई सरकार पर ही बना हुआ है लेकिन अगले कुछ दिनों में जब अलग-अलग राज्यों के चुनाव प्रचार समितियों का गठन होगा तो हिमाचल में कांग्रेस के नए सियासी समीकरण को जोर-शोर से प्रचारित भी किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि यह नई कांग्रेस की ही परिभाषा है कि अब राज्यों की विरासत या एक व्यक्ति पर केंद्रित पार्टी की राजनीति नहीं चलने वाली। उनका कहना है कि इस फैसले से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पार्टी की ना सिर्फ सकारात्मक और बदली हुई नीतियों का पता चलता है बल्कि आने वाले चुनावों में पूरी रणनीति का ताना-बना भी दिख रहा है।

सुखविंदर सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल की राजनीति को करीब से समझने वाले चंद्रदेव ठाकुर कहते हैं कि जिस तरीके से कांग्रेस ने सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाया है वह उनके लिए देश के अलग-अलग राज्यों में राजनीति को आगे बढ़ाने का बड़ा आधार बन सकते हैं। हिमाचल प्रदेश, खास तौर से शिमला के लोगों को इस बात का बखूबी अंदाजा है कि सुक्खू ने यहां की सड़कों पर अखबार भी बेचे हैं और दूध बेचने से लेकर पीसीओ तक चलाया है। शिमला में हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पार्षद भी रहे हैं। सुक्खू का शुरुआती संघर्ष इस बात को बताता है कि वह एक सामान्य व्यक्ति से जन नेता बने हैं। कांग्रेस उनकी इसी छवि को अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनावों से लेकर 2024 में होने वाले लोकसभा के चुनावों में एक संदेश देकर चुनावी माहौल को अपने पक्ष में की कोशिश करेगी। उनका कहना है कि पार्टी के लिए यह एक नई परिभाषा के तौर पर भी है।
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सुखविंदर सिंह सुक्खू - फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि कांग्रेस में सुखविंदर सुक्खू ऐसे पहले नेता नहीं है जो मुफलिसी से निकलकर मुख्यमंत्री बने हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार जेपी कांडल कहते हैं कि कांग्रेस अगर सुक्खू के माध्यम से कुछ संदेश देने की कोशिश कर रही है तो उसको बहुत सधी हुई रणनीति बनानी होगी। वो कहते हैं कि इससे पहले पंजाब में भी कांग्रेस की ओर से बनाए गए मुख्यमंत्री रणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने इसी तरीके से सामान्य व्यक्ति से मुख्यमंत्री तक के सफर को भुनाने की खूब कोशिश की थी। उनका कहना है कि राजनीतिक सूझबूझ में कमी के चलते हैं कांग्रेस पार्टी जमीनी नेताओं को बड़े स्तर पर भुनाने में कामयाब नहीं हो पाई। कांंडल कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी हिमाचल में विरासत की राजनीति को दरकिनार कर सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाए जाने के साथ-साथ उनकी दूध बेचने से लेकर अखबार बेचने और पीसीओ चलाने तक की सामान्य व्यक्ति वाली छवि को आगे लेकर अन्य राज्यों के चुनावी मैदान में पहुंचती है तो एक सकारात्मक संदेश तो पहुंचेगा ही। हालांकि उनका कहना है पार्टी को इसके लिए मजबूत रणनीति बनानी पड़ेगी। 
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