परिवारवाद के आरोपों पर सफाई देते हुए हिमाचल में भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि अनुराग आज जो भी हैं, वो मेरी वजह से नहीं बल्कि अपनी वजह से हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें मेरे साथ जोड़कर परिवारवाद से जोड़ा जाता है।
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अपने हमीरपुर निवास पर अमर उजाला से बातचीत में धूमल ने कहा कि कई बार मैं यह परिचय देता हूं कि मैं अनुराग का पिता हूं। राजनीति में उसकी रुचि नहीं थी। वह क्रिकेट खेलता था। पंजाब रणजी टीम का वह सदस्य रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर वह अंडर 14 और 17 क्रिकेट टीम का कप्तान रहा है। वह देश के क्रिकेट संस्थानों से भी जुड़ा रहा।
वीरभद्र की बदले वाली भावना ने अनुराग को बनाया नेता
बतौर धूमल कांग्रेस और वीरभद्र सिंह की बदले की भावना वाली राजनीति ने अनुराग को नेता बनाया। धूमल के अनुसार जब वे पहली दफे हमीरपुर से चुनाव लड़ने वाले थे, तभी उनके दूसरे पुत्र अरुण ने इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया। उसी वक्त अनुराग ने क्रिकेट का करियर छोड़ कर परिवार की देखभाल करनी शुरू कर दी। उसके बाद वह हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ गया।
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2003 में जब हमारी सरकार चली गई, तब वीरभद्र सिंह ने बदले की भावना से अनुराग पर कई झूठे मुकदमे लाद दिए। उन मुकदमों से लड़ते-लड़ते अनुराग की छवि सामंती मानसिकता के खिलाफ लड़ने वाले प्रतीक के रूप में बन गई। सामंती सोच के खिलाफ लड़ाई का वह चेहरा बन गया। क्रिकेट में सक्रियता की वजह से वह अरुण जेटली जी के संपर्क में आया। उन्होंने भी उसकी क्षमता का आंकलन किया।
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ये है अनुराग की राजनीति में एंट्री की कहानी
prem kumar dhumal
अनुराग की राजनीतिक एंट्री का खुलासा करते हुए धूमल ने बताया कि 2007 में हमीरपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव होने थे। उसके ठीक 6 माह बाद राज्य विधानसभा के भी चुनाव होने थे। उपचुनाव के लिए हमने कई नाम दिए थे। पार्टी ने कहा आपको चुनाव लड़ना है, मैंने कहा नहीं। 6 माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं।
मैं वहां चुनाव लड़ूंगा, मगर अटलजी के आगे किसी की नहीं चली। धूमल बताते हैं कि अटल जी की वह अंतिम चुनाव समिति बैठक थी। उस दिन संसदीय बोर्ड की बैठक में वे शांत होकर चुपचाप बैठे थे। बाद में एकदम से बोले सुनिए, तो सब शांत हो गए। तब अटल जी ने कहा कि यदि हमें हिमाचल में सरकार बनानी है तो हमीरपुर जीतना बहुत जरूरी है और हमीरपुर जीतने के लिए धूमल जी आपका लड़ना जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि धूमल जी आप लड़िए, जीतिए और सरकार भी बनाइए। बतौर धूमल, उन्होंने तब अटलजी से कहा सर आप मुझे भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल कर रहे हैं। आप जानते हैं कि मैं आपका बहुत आदर करता हूं। तब सुषमा स्वराज ने बात पकड़ ली और सुषमा ने कहा कि यदि यह पैकेज है तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। मेरी ओर इशारा करते हुए कहा सरकार को भी आप लीड करेंगे। बतौर धूमल, सुषमा से उनकी बात चल ही रही थी कि अटल जी ने कहा सुनो और उन्होंने अपना चश्मा टेबल पर रख दिया।
उस दिन वे एक बैग लेकर बैठक में आए थे। धूमल ने बताया कि अटलजी ने उनसे कहा कि उनके घुटनों में आजकल दर्द बहुत होता है। उसके बाद उठे और बैठक से चल दिये। उसके बाद मैंने आडवाणी जी से कहा कि मुझे उपचुनाव नहीं लड़ना, लेकिन आडवाणी ने कुछ भी नहीं कहा। फिर मैंने बगल में बैठे गोपीनाथ मुंडे से कहा कि यदि आज हमारा दोस्त प्रमोद होता तो इस वक्त हमारे साथ खड़ा होता। लेकिन सबने कहा कि अटलजी जब बोल देते हैं तो उस पर कोई कुछ नहीं कर सकता।
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मैंने दिल्ली में एक दिन लेट भी किया कि उपचुनाव लड़ने का फैसला वापस हो, लेकिन पार्टी ने उम्मीदवार बनाया। 5 जून को परिणाम आने पर मैं लोकसभा के लिए चुना गया। उसके बाद नवंबर में विधानसभा के चुनाव हुए। पार्टी की सरकार बनी मैं सीएम बना, फिर हमीरपुर लोकसभा पर उपचुनाव होने थे। एक दिन शाम को राजनाथ जी का फोन आया कि कल चुनाव समिति की बैठक है। बैठक में हम हमीरपुर के उम्मीदवार का नाम तय कर लेंगे।
आपको बैठक में आने की जरूरत नहीं है। इस पर मैंने राजनाथ से कहा कि अमूमन सीएम चुनाव समिति की बैठक में शामिल होते हैं। इस पर सिंह ने कहा कि हम तय कर लेंगे, आपको आने की जरूरत नहीं है। अगले दिन शाम को पता चला कि अनुराग को पार्टी ने हमीरपुर से उम्मीदवार बना दिया। अब इसे आप परिवारवाद कहिये या जो भी.....।
अनुराग बोले- मैं एक घोड़ा, जो फील्ड में भागता रहता है
अनुराग ठाकुर भी कहते हैं कि उनका राजनीति में आने का इरादा नहीं था। समय ने इस ओर धकेल दिया। उनकी रुचि क्रिकेट में थी। 25 वर्ष की उम्र में धर्मशाला में दुनिया का बेहतरीन स्टेडियम बनवा डाला। अपने भावी राजनीतिक भविष्य पर अनुराग कहते हैं कि वे एक घोड़ा हैं, जो फील्ड में भागते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी रुचि पार्टी के जरिये दिए कार्यों को करने की है।
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी छवि परिवार के इतर
अनुराग पर बेशक परिवारवाद के आरोप लगते हैं लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में उनकी छवि धूमल पुत्र होने से अलग है। अपने व्यवहार से अनुराग ने युवाओं के बीच अपनी छवि अलग से बनाई है। पूरे प्रदेश में उन्हें चाहने वाले युवाओं की एक बड़ी फौज है। हमीरपुर भाजपा युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष अभिषेक का कहना है कि अनुराग बहुत मिलनसार हैं।
पिता के बदौलत नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। कांगड़ा जिले के नगरोटा विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ता विशाल ठाकुर का भी कहना है की अनुराग ने युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
धर्मशाला क्रिकेट मैदान के अलावा राज्य के अलग-अलग इलाकों में भी अनुराग ने खेल को प्रोत्साहन देने के लिए मैदान बनवाए हैं। लेकिन विशाल को इस बात की कसक भी है कि अनुराग के क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष रहने के बावजूद भी सूबे के एक भी खिलाड़ी का नंबर क्रिकेट की राष्ट्रीय टीम में अब तक नहीं आ पाया है। अनुराग को यह सुनिश्चत करना चाहिए।