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हिमाचल चुनाव: विरोध के भय ने रोकी भाजपा उम्मीदवारों की सूची, डैमेज कंट्रोल में जुटा आलाकमान

Wed, 18 Oct 2017 03:45 PM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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हिमाचल विधानसभा चुनाव में प्रचार से लेकर उम्मीदवार चयन के मामले में आगे दिखने वाली भाजपा के कदम थोड़े थम से गये हैं। विरोध के भय से पार्टी उम्मीदवारों की सूची पिछले पांच दिनों से रुकी पड़ी है।
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14 अक्टूबर को पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक संपन्न होने के बावजूद भी अब तक हिमाचल चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवारों की सूची सामने नहीं आ सकी है। पार्टी आलाकमान को पुराने और वरिष्ठ नेताओं के विरोध की आशंका सता रही है।

भय का आलम यह है कि उम्मीदवारों की सूची जारी किए बिना ही पार्टी अध्यक्ष ने कई उम्मीदवारों को चुपके से सिंबल थमाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को करीब दो दर्जन उम्मीदवारों को प्रदेश अध्य्क्ष की ओर से सिंबल थमाए गए हैं।
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भाजपा को विद्रोह की आशंका इसलिए सता रही है कि पीढ़ीगत बदलाव के क्रम में कई पूर्व विधायकों के नाम उम्मीदवारों की संभावित सूची से नदारद हैं। जबकि इस दफे पार्टी के पक्ष में माहौल बनता देख इन पूर्व विधायकों ने जमकर जमीन पर अपनी तैयारी कर रखी है।

ऐसे में कुछ विधायकों ने बगावत के संकेत भी दे दिए हैं। तो दूसरी ओर प्रदेश भाजपा के दोनों वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार की नाराजगी ने पार्टी के चुनाव अभियान का स्वाद बिगाड़ दिया है।

बताया जा रहा है कि धूमल और शांता दोनों ही नेता टिकट बंटवारे की प्रक्रिया को लेकर नाराज हैं। उनके समर्थकों को किनारे लगाते हुए पार्टी ने संघ और एबीवीपी से जुड़े लोगों को भारी संख्या में उम्मीदवार बनाने का मन बनाया है।

हालांकि भाजपा आलाकमान अभी से ही डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। नाराज बताये जा रहे प्रदेश भाजपा के दोनों वरिष्ठ नेताओं को साधने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को सौंपी गई है।

नड्डा ने की शांता से मुलाक़ात, शांता के मानने के आसार नहीं
पार्टी आलाकमान के इशारे पर आज बुधवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पालमपुर पहुंच कर नाराज चल रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार को साधने की कोशिश की है।

मगर सूत्र बता रहे हैं कि शांता के मानने के आसार नहीं है। उन्होंने अपने प्रभाव वाले इलाकों में अपनी पसंद के उम्मीदवारों के लिए टिकट की मांग रखी है। यदि शांता की इस मांग को पार्टी आलाकमान मानता है तभी वे नाराजगी छोड़ेंगे।

अन्यथा उन्हें साधना पार्टी के लिए मुश्किल रहेगा। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही केंद्र का कोई दूसरा नेता धूमल से भी सम्पर्क करेगा । नड्डा के भी उनसे मिलने जाने के आसार हैं।
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क्यों है धूमल और शांता की नाराजगी

दरअसल धूमल चाहते हैं कि चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पद का चेहरा सामने करे। कांग्रेस के जरिये वीरभद्र सिंह को चेहरा बनाने की बात का हवाला देते हुए उन्होंने पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष भी चेहरा घोषित कर चुनाव में उतरने की बात रखी है।

मगर पार्टी आलाकमान ने उत्तराखंड की तर्ज़ पर बिना चेहरा घोषित किये हुए ही मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। ऐसे में धूमल को लगता है कि चुनाव बाद की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर उनका नंबर नहीं लग पायेगा।

क्योंकि इन दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पार्टी आलाकमान के आंखों के नूर बने हुए हैं। ऊपर से पार्टी ने धूमल को अपनी परंपरागत सीट हमीरपुर के बजाय सुजानपुर से चुनाव लड़ने को कहा है।

मंगलवार से हमीरपुर में धूमल के आंसू छलकने वाले संबोधन की फ़िल्म भी जनता के बीच फैलाई जा रही है। जिसमें वे हमीरपुर के प्रति अपना प्यार जता रहे हैं।

तो शांता कुमार की नाराजगी इसलिए है कि उनके प्रभाव वाले कांगड़ा इलाके की 15 सीटों में से अधिकांश पर उनकी पसंद को दरकिनार किया गया है। मंडी में पार्टी कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले अनिल शर्मा को उम्मीदवार बनाएगी।

तो पालमपुर में भी सम्भावित उम्मीदवार इंदू गोस्वामी पर उनकी राय नहीं मानी गई हैं। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी से पुराने परिचय की वजह से गोस्वामी को सीधे केंद्रीय नेतृत्व ने टिकट थमाया है।

शांता की अपनी परम्परागत सीट शूला में भी उनकी पसंद नहीं मानी जा रही है। इसके अलावा धर्मशाला और फतेहपुर के संभावित उम्मीदवार भी उनकी पसंद के नहीं है। यही वजह है कि शांता नाराज बताये जा रहे हैं।
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