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हिमाचल चुनावः वीरभद्र के लिए 'निर्भया कांड' न बन जाए कोटखाई का गुडिया गैंगरेप

Sat, 04 Nov 2017 12:45 AM IST
हरेन्द्र सिंह मोरल, अमर उजाला डॉटकॉम
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क्या किसी चुनाव में रेप और मर्डर की कोई घटना बड़ा मुद्दा बन सकती है? क्या उस राज्य की जनता रेप की उस घटना को लेकर सरकार के खिलाफ भी जा सकती है?
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राजनीतिक विश्लेषक इन सवालों को शायद बहुत ज्यादा तवज्जो देना जरूरी न समझें, क्योंकि रेप या गैंगरेप की घटना को किसी राज्य की कानून व्यवस्‍था से जोड़कर तो देखा जा सकता है लेकिन उसके राजनीतिक और चुनावी असर पर शायद ही कोई बहस की जाए।

लेकिन हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में बीते जुलाई महीने में स्कूली छात्रा से गैंगरेप और हत्या की घटना वीरभद्र सिंह सरकार के लिए जी का जंजाल बन सकती है। कुछ वैसे ही जैसे दिल्‍ली में साल 2012 में हुआ निर्भया कांड, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
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निर्भया कांड के कारण ही दिल्‍ली की शीला दी‌क्षित सरकार को अपना 15 साल का सिंहासन एक झटके में गंवाना पड़ा था और इसका खामियाजा केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार को भी भुगतना पड़ा। 

हिमाचल प्रदेश में चुनावी माहौल का जायजा लेने निकली अमर उजाला डॉट कॉम की टीम ने जब विभिन्न इलाकों में स्‍थानीय लोगों से बातचीत की तो एक बात साफ हो गई कि कोटखाई कांड को बेशक कई महीनों का वक्त बीत चुका है, लेकिन लोगों के जेहन से यह वाक्या अभी तक उतरा नहीं है।

कोटखाई में स्कूल से लौटती 15 साल की छात्रा के साथ जिस तरह दरिंदगी की गई और गैंगरेप के बाद हत्या कर उसका शव सड़क पर फेंक दिया गया उसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। आज भी लोगों के मन में इस घटना को लेकर सरकार और कानून व्यवस्‍था को लेकर गुस्सा है। भाजपा भी पूरी तरह इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके बैनर पोस्टरों में भी 'गुडिया' का जिक्र किया गया है। 

स्‍थानीय लोगों में नाराजगी

इस घटना को लेकर स्‍थानीय लोगों की नाराजगी की पहली झलक तब देखने को मिली जब हमारी गाड़ी शिमला के सफर में भुंतर में कुछ देर के लिए रुकी। चाय की चुस्कियों के दौरान जब कुछ लोगों से स्‍थानीय मुद्दों पर बात की गई तो बिजली-पानी को लेकर सभी संतुष्ट नजर आए लेकिन कानून व्यवस्‍था को लेकर नाराजगी दिखी।

पहाड़ी राज्यों में आमतौर पर कानून व्यवस्‍था ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं होता, लेकिन यहां मामला उलट था। सवाल पूछा गया कि ऐसा क्यों? जवाब दिया चाय की दुकान चलाने वाले जेके उर्फ जय किशन ठाकुर ने, बोले- "साहब लाइट-वाइट की दिक्‍कत हमें नहीं होती, पानी भी खूब आता है लेकिन जिस तरह पिछले कुछ समय में कानून व्यवस्‍था बिगड़ी है वो बड़ा बुरा है।

अब वो कोटखाई का गुडिया गैंगरेप तो आपने सुना होगा। साहब- उस घटना ने पहाड़ के हर आदमी को तोड़ कर रख दिया, दूर दूर तक बदनामी हुई।" 

मैंने पूछा, तो इसमें सरकार का क्या दोष वो तो कुछ असामाजिक तत्वों का काम था जिन्हें पुलिस पकड़ चुकी है केस सीबीआई देख रही है। मेरी बात से असहमति जताते हुए ठाकुर बोले- "नहीं, मामले में जिस तरह से सरकार ने लापरवाही बरती और मुख्यमंत्री ने यह बयान दिया कि ऐसी घटना तो होती रहती हैं, उससे हर आदमी नाराज है।"  जयकिशन किसे वोट देंगे उन्होंने अपना इरादा साफ कर दिया था। 

उनसे कुछ दूर ही किराना की दुकान चलाने वाले अशोक शर्मा अपनी दुकान पर फिलहाल फुर्सत में हैं। उनके साथ उनके दोस्त अजय और रोहित बातों में मशगूल हैं। गुडिया गैंगरेप का जिक्र छिड़ते ही अचानक उनके हंसते चेहरे पर उदासी छा जाती है।

ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की तलाश में लगे अजय बताते हैं की उस घटना ने हम सबको झकझोर कर रख दिया। हर अखबार उस घटना की खबरों से ही पटा रहता था, पुलिस ने तो इस मामले में लापरवाही बरती ही सरकार ने भी उसमें लीपापोती में कोई कसर नहीं छोड़ी। नजदीक खड़े दुकान मालिक अशोक हालांकि इसे चुनावी मुद्दा तो नहीं मानते लेकिन ये जरूर कहते हैं कि इस घटना के कारण सरकार को बहुत बदनामी झेलनी पड़ी।
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सरकार की लापरवाही ने बिगाड़े हालात

सोलन में भी जब इस मुद्दे पर स्‍थानीय लोगों से बातचीत की गई तो एक बात साफ थी कि अन्य चुनावी मुद्दों की तरह गुडिया गैंगरेप और मर्डर भी इस बार एक बड़ा फैक्टर रहेगा।

सोलन में ही रंगाई पुताई का काम करने वाले जगदीश चंद्र कहते हैं कि अगर सरकार ने शुरूआत से ही उस मुद्दे पर सख्ती दिखाई होती तो ये इतना तूल न पकड़ता। लेकिन शुरूआत में वीरभद्र सिंह की सरकार ने इस मुद्दे को काफी हल्के में लिया जिससे स्‍थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया और जब तक बात संभलती मामला हाथ से निकल चुका था। 

स्‍थानीय पत्रकार जितेन्द्र भी मानते हैं कि गुड़िया गैंगरेप और मर्डर इस बार के चुनावों में बड़ा मुद्दा है। वीरभद्र सिंह की सरकार ने बेशक कई मोर्चों पर अच्छा काम किया हो लेकिन गुड़िया प्रकरण के चलते वह कानून व्यवस्‍था के मामले में अपने हाथ जला बैठे हैं।

सरकार ने जिस तरह से इस मुद्दे पर लापरवाही दिखाई उससे लोगों में गलत संदेश गया, जिसका असर चुनावों में देखने को मिल सकता है। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने भी कई बार सरकार को फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही यह मामला सीबीआई के सुपुर्द गया था। 

सीबीआई ने जांच शुरू करते ही इस मामले में स्‍थानीय पुलिस के आईजी जहूर एच जैदी, ठियोग के पूर्व डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई पुलिस थाने के पूर्व एसएचओ राजेंद्र सिंह, पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एएसआई दीप चंद, एचएचसी सूरत सिंह, हेड कांस्टेबल मोहन लाल, हेड कांस्टेबल रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत को जेल भेज चुकी है। इस मामले में सरकार पर सबसे संगीन आरोप कुछ खास लोगों को बचाने के लगे, सीबीआई इसकी भी जांच कर रही है।
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