अमेरिकी चुनाव अपनी परिणति की ओर बढ़ रहा है। जाहिर तौर पर पूरी दुनिया सबसे ताकतवर देश के चुनाव पर बारीकी से निगाह रख रही है। जहां तक भारत की बात है तो सबसे अहम जिज्ञासा यह है कि डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की जीत का दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा।
मेरा मानना है कि चाहे ट्रंप जीतें या फिर हिलेरी, जहां तक भारत-अमेरिका के लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए कि दोनों ही दल भारत से बेहतर रिश्ते बनाए रखने के हिमायती हैं।
हां, अहम बात यह है कि हिलेरी-ट्रंप की जीत-हार से विभिन्न मुद्दों पर इनकी अलग-अलग राय और सोच दक्षिण एशिया की कूटनीतिक परिस्थितियों के साथ-साथ भारत के रूस सहित अन्य देशों से संबंधों के अलावा अमेरिका में भारतीयों के रोजगार पाने के अवसरों पर असर जरूर डालेंगे।
सबसे पहले मैं दोनों उम्मीदवारों के व्यक्तित्व और इनकी भारत और दक्षिण एशिया को ले कर समझ की बात करूंगा। इस मोर्चे पर हिलेरी की जीत भारत के लिए फायदेमंद है। ओबामा सरकार में विदेश मंत्री की भूमिका निभा चुकी हिलेरी को इस क्षेत्र का व्यापक अनुभव है।
जबकि ट्रंप के मामले में कई मोर्चों पर अब भी अस्पष्टता है। सीधे शब्दों में कहें तो हिलेरी भारत को जानती हैं और भारत हिलेरी को जानता है। जबकि ट्रंप के बारे में ऐसा नहीं का जा सकता। इस लिहाज से अगर जीत डेमोक्रेट को मिली तो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गाड़ी को आगे बढ़ाने केलिए नए सिरे से कूटनीतिक मशक्कत की समझ नहीं होगी।
जबकि रिपब्लिकन की जीत से कई मुद्दों पर भारत-अमेरिका को नए सिरे से अपनी समझ विकसित करनी होगी।