पत्नी से मारपीट, दहेज की मांग, उसके चरित्र पर अंगुली उठाना, वेतन छीनना, ससुर से पैसे लेना व वापस न करना उनके प्रति क्रूरता है। हाईकोर्ट ने उक्त तर्क देते हुए कहा कि क्रूरता का कोई मापदंड तय नहीं किया जा सकता। क्रूरता की परिभाषा हर मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर तय की जाती है।
न्यायमूर्ति प्रदीपनंदजोग व न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की खंडपीठ यह निर्णय एक मामले में पति की याचिका को खारिज करते दी। पति ने क्रूरता के आधार पर पत्नी को प्रदान तलाक संबंधी पारिवारिक अदालत द्वारा दिए फैसले को चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा इस मामले में पति ने पत्नी से हर प्रकार का दुर्व्यवहार किया। इस शिकायत के बाद पति ने पुलिस के समक्ष लिखित रूप से माना था कि उसने उक्त सभी कार्य किए हैं। उसने लिखकर माफी मांगते हुए माना था कि वह भविष्य में मारपीट नहीं करेगा, उसका वेतन नहीं छीनेगा, उसके चरित्र पर अंगुली नहीं उठाएगा और न ही दहेज मांगेगा।
अदालत ने पति के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसने माफी मात्र पत्नी की इगो को संतुष्ट करने और विवाह को बचाने के लिए मांगी थी।