फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court: हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला, AIADMK के पलानीस्वामी को मिली बड़ी राहत; जानें पूरा मामला

Thu, 04 Sep 2025 03:11 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

मद्रास हाईकोर्ट ने एआईएडीएमके महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सूर्यमूर्ति की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उनके महासचिव चुने जाने पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि सूर्यमूर्ति 2018 से पार्टी के सदस्य नहीं हैं, इसलिए वे ऐसे मामलों को चुनौती नहीं दे सकते। 
विज्ञापन
मद्रास उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को बड़ी राहत दी है। दरअसल, अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उनके महासचिव चुने जाने पर सवाल उठाए गए थे।
विज्ञापन


जुलाई 2022 को एआईएडीएमके की जनरल काउंसिल यानि पार्टी की बड़ी बैठक हुई थी। इस बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए और पलानीस्वामी को पार्टी का महासचिव घोषित किया गया। लेकिन सूर्यमूर्ति नाम के एक व्यक्ति ने कोर्ट में याचिका डालकर कहा कि यह चुनाव ठीक तरीके से नहीं हुआ है और पास किए गए प्रस्ताव भी अवैध हैं।

निचली अदालत का क्या फैसला था?
चेन्नई की सिविल कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की। पलानीस्वामी ने कोर्ट से कहा था कि यह केस खारिज किया जाए क्योंकि सूर्यमूर्ति पार्टी के सदस्य ही नहीं हैं। लेकिन सिविल कोर्ट ने पलानीस्वामी की इस दलील को खारिज कर दिया और केस को आगे बढ़ाया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- दिल्ली में 'जल प्रलय', यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन तक पहुंचा यमुना का पानी, DMRC का अलर्ट

हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
अब मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश पलट दिया। जज ने साफ कहा कि सूर्यमूर्ति 2018 से पार्टी के सदस्य ही नहीं हैं। जब कोई व्यक्ति पार्टी का सदस्य ही नहीं है, तो वह पार्टी के फैसलों को चुनौती नहीं दे सकता। इसलिए सूर्यमूर्ति की याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया।

सूर्यमूर्ति का राजनीतिक रोल
पलानीस्वामी की टीम ने अदालत में यह भी दलील दी कि सूर्यमूर्ति ने 2021 विधानसभा चुनाव में खुद पलानीस्वामी के खिलाफ एदप्पाडी सीट से चुनाव लड़ा था। यानि वह न केवल सदस्य नहीं हैं बल्कि राजनीतिक रूप से विरोधी भी हैं। ऐसे में उनका याचिका दाखिल करना तर्कसंगत नहीं है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- हरियाणा में बर्बादी की बारिश: अंबाला-भूना में घरों में घुसा पानी, 3 ड्रेनों में आई दरार; लाडवा में तटबंध टूटा

पलानीस्वामी की स्थिति और मजबूत
इस फैसले के बाद पलानीस्वामी की स्थिति पार्टी के भीतर और भी मजबूत हो गई है। महासचिव के रूप में उनके चुनाव को लेकर जो कानूनी पेंच था, वह अब खत्म हो गया है। यह फैसला एआईएडीएमके के लिए भी अहम है क्योंकि इससे पार्टी के अंदरूनी विवाद काफी हद तक शांत हो सकते हैं और पलानीस्वामी का नेतृत्व और मजबूत हो जाएगा।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें