हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसरों/शिक्षकों को राहत देते हुए उनको पुनर्नियुक्ति नहीं देने के कुलपति के निर्णय को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कुलपति कार्यपारिषद में लिए गए फैसले के अनुरूप पुनर्नियुक्ति के आवेदन पर विचार कर सकते हैं।
प्रो. रामकिशोर शास्त्री सहित अन्य प्रोफेसरों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। याचिका में कहा गया कि यूजीसी की योजना के तहत विश्वविद्यालयों से 65 वर्ष की आयु में रिटायर हुए शिक्षकों को तीन वर्ष के लिए पुनर्नियुक्ति दी गई थी।
कार्यपरिषद ने इस संबंध में 25 फरवरी 2016 को प्रस्ताव पास किया कि पुनर्नियुक्ति देने के लिए कुलपति प्रत्येक आवेदक के नाम पर उसके कार्य और रिकार्ड को ध्यान में रखते हुए विचार करेंगे, मगर कुलपति ने इसके विपरीत सभी अध्यापकों को पुनर्नियुक्ति नहीं देने का निर्णय ले लिया। याचिका में कहा गया कि कुलपति ने कार्य परिषद के निर्णय की गलत व्याख्या करते हुए मनमाना निर्णय लिया है।