केंद्र सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) के बीच शांति वार्ता अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है। 31 अक्तूबर को केंद्र और एनएससीएन (आईएन) के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। किसी तरह की अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए नगालैंड और मणिपुर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दोनों राज्यों में पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद कर दी गई हैं।
इसके अलावा दो महीने का राशन और ईंधन भी जमा कर लिया गया है। पड़ोसी राज्य मणिपुर के उखरूल जिले में प्रशासन ने नागरिक आपूर्ति विभाग से जरूरी सामान जमा करके रखने को कह दिया है ताकि किसी तरह की प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर आपूर्ति में बाधा न हो।
क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ भाजपा का प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिलना चाहता है। नगालैंड के मुख्य सचिव टेमजेन टॉय ने बताया कि हालात सामान्य हैं। जनता को डरने की आवश्यकता नहीं है। नगालैंड के डीजीपी लॉन्गकुमेर ने कहा कि लोगों को खुश रहना चाहिए कि उनकी सुरक्षा के लिए राज्य की पुलिस हाई अलर्ट पर है।
कई सामाजिक संगठनों छात्र संगठनों ने पहले ही बातचीत से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जाहिर की है। प्रभावशाली नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया, जिसमें एक नागा राष्ट्रीय ध्वज के जरिए नागा पहचान को अस्तित्व दिए जाने की मांग की गई है। केंद्र और एनएससीएन (आईएन) के बीच हुई बातचीत के आखिरी चरण में अलग झंडे और संविधान को लेकर गतिरोध खत्म नहीं किया जा सका। हालांकि, दोनों पक्ष इस पर दोबारा बातचीत के लिए तैयार हैं।