अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों ने हेरोइन छिपाने का जो नया तरीका खोजा है, उससे जांच एजेंसियों की नींद उड़ गई है। तरीका भी ऐसा है कि वह न तो इंसान की नजर में आ पाता है और न ही कोई उपकरण उसे खोज सकता है। जांच एजेंसियों के खोजी कुत्ते भी इस नई तकनीक तक पहुंचने में असफल हैं। अफगानिस्तान से जो मसाला आ रहा है, ड्रग तस्कर उसकी बोरियों में हेरोइन छिपा देते हैं, लेकिन वह किसी की नजर में नहीं आती। बोरी को खाली कर खोजी कुत्ते के सामने रख दिया जाता है, मगर किसी को कुछ पता नहीं चलता। सच्चाई यह है कि उसी खाली बोरी में हेरोइन होती है।
अभी हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है। जामिया नगर थाने के तहत जाकिर नगर में लंबे समय से ड्रग तस्करी का धंधा चल रहा था। चूंकि ड्रग बोरी में आती है और उसका किसी को पता नहीं चलता, इसलिए ड्रग तस्कर बेधड़क होकर अफगानिस्तान से हेरोइन मंगवाते और उसे अलग-अलग साइज के पैकेट में बंद कर श्रीलंका व मलेशिया के अलावा पंजाब, यूपी, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा और दूसरी जगहों पर भेजते थे।
अगर जांच एजेंसियों के उपकरणों या खोजी कुत्तों की बात करें तो तस्करी के इस तरीके को पकड़ पाने में ये सब फेल हो गए। इसका खुलासा स्पेशल सेल ने अपनी इंटेलीजेंस की मदद से किया। स्पेशल सेल, कस्टम और नारकोटिक्स विभाग के पास यह सूचना तो थी कि अफगानिस्तान से ड्रग आ रही है, लेकिन वह किस रूप में आ रही है, यह नहीं मालूम था। इंटेलीजेंस से पता लगा कि जाकिर नगर में रात के समय लग्जरी गाड़ियां आती हैं। वह इलाका काफी पिछड़ा हुआ माना जाता है। यहीं से स्पेशल सेल को शक हो गया और जाल बिछाकर ड्रग तस्करों को पकड़ लिया गया।
तरीका ऐसा था कि जानकर हैरान हो जाएंगे
ड्रग तस्करों ने बताया कि वे अफगानिस्तान से आने वाले मसाले में हेरोइन छिपा देते थे। अफगानिस्तान से ही हेरोइन वाली बोरियों पर निशान लगा दिया जाता था। उसके बाद हर जगह पर बोरी को ट्रैक किया जाता। दिल्ली पहुंचने के बाद उस बोरी को आसानी से ड्रग तस्कर अपने कब्जे में ले लेते थे। अफगानिस्तान में जहां पर मसाले पैक होते थे, वहां इन तस्करों की सेटिंग थी।
हेरोइन को एक केमिकल में डाला जाता है। करीब दो घंटे बाद उस केमिकल में खाली बोरी डाल दी जाती है। बोरी को सुखाने के बाद उसमें मसाला भर देते हैं। जांच एजेंसियां बोरी को चेक करतीं, लेकिन उन्हें हेरोइन का पता नहीं चलता था। हेरोइन को जिस केमिकल में डाला जाता था, वह बोरी के सुराखों में जम जाता था। बोरी को खाली करने के बाद अलग से उसे झाड़ा-पिछोड़ा जाता तो हेरोइन निकलती थी।
इस तरीके से एक बोरी में करीब डेढ़ किलोग्राम तक हेरोइन लाई जा रही थी। खोजी कुत्ता बोरी के पास आता, लेकिन वह हेरोइन को नहीं तलाश पाता। वजह, बोरी में मसाले की महक बहुत तेज होती थी। इस तरकीब से ड्रग तस्कर हर सप्ताह हेरोइन की एक खेप मंगवाकर उसे दूसरी जगहों पर भेज देते थे। स्पेशल सेल अब इस मामले की तह पहुंचने के लिए फोरेंसिक लैब की मदद ले रही है।