इससे पहले जनरेशन अल्फा का समय था। जन सांख्यिकीविद् मार्क मैक्रिंडल कहते हैं, "जबकि जनरेशन अल्फा ने स्मार्ट तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उदय का अनुभव किया है, जनरेशन बीटा एक ऐसे युग में रहेगी जहां - शिक्षा और कार्यस्थलों से लेकर स्वास्थ्य देखभाल और मनोरंजन तक एआई होगा। " मैक क्रिंडल के ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, 2035 तक वैश्विक आबादी में उनकी हिस्सेदारी 16 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो एक महत्वपूर्ण संख्या है और जो भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और समाजों को प्रभावित करेगी।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी नाम की कहानी
- जीआई पीढ़ी : इस पीढ़ी का काल वर्ष 1901-1927 के बीच माना जाता है। यह पीढ़ी महामंदी के दौरान बड़ी हुई और द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ने के लिए आगे बढ़ी। इस पीढ़ी को जन सांख्यिकीविद् एक महान पीढ़ी मानते हैं।
- द साइलेंट जनरेशन : इस पीढ़ी का काल वर्ष जन्म 1928-1945 के बीच माना जाता है। द साइलेंट जनरेशन अपनी अनुशासित प्रवृत्तियों के लिए जानी जाती है, क्योंकि यह पीढ़ी द्वितीय विश्व युद्ध और शीत युद्ध के शुरुआती सालों के दौरान बड़ी हुई थी।
- बेबी बूमर्स : इसे संक्षिप्त में 'बी बूमर्स' भी कहा जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जन्मदर में भारी वृद्धि को देखते हुए इस दौर की पीढ़ी के लिए समाज विज्ञानियों और मीडिया ने यह नाम प्रयोग किया और धीरे-धीरे यह आम प्रचलन में आ गया। इसकी शुरूआत 1946 से हुई। जन्मदर में यह उछाल 1964 देखा गया और इसी आधार पर इस पीढ़ी का समयांतराल 1946 से 1964 तय किया गया।
- जेन एक्स: बेबी बूमर्स के बाद 1990 के दशक तक कोई भी पीढ़ीगत नामकरण नहीं हुआ। कुछ पत्रकारों ने 'बेबी बस्टर्स’ नाम सुझाया, लेकिन यह चल नहीं पाया। बाद में बूमर्स के बाद यानी 1965 के बाद की पीढ़ी पर आधारित डगलस कूपलैंड के उपन्यास से इस पीढ़ी को 'जनरेशन एक्स' नाम मिला, जो 'जेन एक्स' के नाम से प्रचलित हुआ। इसकी सीमाओं को लेकर विवाद रहता हैं, लेकिन सामान्य तौर पर 1965 से 1980 की पीढ़ी को यह नाम समर्पित किया जाता है।
फिर सामने आई मिलेनियल्स पीढ़ी
2000 के शुरुआती वर्षों में फिर से नई पीढ़ी के नामकरण पर बात होने लगी तो सबसे पहले 'जेन एक्स' के बाद 'जेन वाई' का सुझाव आया, लेकिन यह लोगों को भाया नहीं। इसके बाद साल 2000 में आई नील होवे और विलियम स्ट्रॉस की किताब 'मिलेनियल्स राइजिंग' से 1980 के बाद की पीढ़ी को 'मिलेनियल्स' का तमगा मिला। इस पीढ़ी में आत्म-केंद्रित व्यक्तिवादी की संस्कृति ने जन्म लिया। इसने अधिकार और समानता दोनों पर बात की। इस पीढ़ी में 1981 से 1996 पैदा हुए लोग आते हैं।
स्मार्टफोन के बीच पलने वाली जेंजी
2010 के दशक के बाद समाज विज्ञानियों ने महसूस किया कि एक नई पीढ़ी आ गई है, जिनकी पूरी युवावस्था मोबाइल फोन के साथ बीती है और यह मिलेनियल्स से काफी अलग है। इस आधार पर 2012 के बाद की पीढ़ी को जनरेशन जेन नाम मिला। इसे जेंजी भी बुलाते हैं। इनमें इंटरनेट के यूज को देखते हुए इन्हें आई-जेन भी कहते हैं।
डिजिटल दौर की पीढ़ी जनरेशन-अल्फा
2013 से 2024 तक की पीढ़ी का नाम जनरेशन अल्फा है। सबसे पहले जनरेशन अल्फा शब्द का इस्तेमाल मार्क मैक्रिंडल ने अपने शोध पत्र में किया था। इस जनरेशन को 'मिनी मिलेनियल्स' भी कहा जाता है, क्योंकि इनके माता-पिता मिलेनियल्स हैं। जेन-अल्फा तकनीकी दृष्टि से सबसे अधिक प्रवीण और डिजिटल उपकरणों से घिरी हुई है। इसके अलावा, जेनरेशन अल्फा का सामाजिक दृष्टिकोण अधिक समावेशी और विविधतापूर्ण है, जिससे वे पर्यावरणीय और वैश्विक मुद्दों पर जागरूक हैं।
और नाम मिला बीटा
जनरेशन अल्फा के क्रम को आगे रखते हुए नई पीढ़ी को ग्रीक अल्फाबेट के दूसरे अक्षर बीटा से यह नाम मिला। बीटा पीढ़ी के बच्चों की दुनिया भर में चर्चा भारत में ‘जनरेशन बीटा’ के पहले बच्चे का जन्म मिजोरम में हुआ है। इस बच्चे का नाम फ्रेंकी रखा गया है और उसके पिता का नाम जेड्डी रेमरुअत्संगा और मां का नाम रामजिरमावी है। बच्चे का जन्म 1 जनवरी लगने के 3 मिनट बाद यानी 12 बजकर तीन मिनट पर हुआ था। उधर, ऑस्ट्रेलिया में रेमी नाम की बच्ची को दुनिया में नई बीटा पीढ़ी की पहली संतान माना जाता है। न्यू साउथ वेल्स के कॉम्बॉयने में त्जे-लिंग हुआंग और लियाम वॉल्श के घर जन्मी रेमी चिकित्सकों के अनुसार अनुमानित समय से दो सप्ताह पहले पैदा हो गई। इस संयोग ने उनके नाम को इतिहास में भी शामिल कर दिया है।