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कोरोना वायरस से बचाने वाले 'हर्ड इम्यूनिटी' में लग सकता है लंबा वक्त : रिपोर्ट

Sat, 23 May 2020 04:27 AM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
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एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हर पांच में से एक व्यक्ति कोरोना वायरस (कोविड-19) से संक्रमित है और ऐसे एंटी बॉडी को विकसित कर चुका है, जो इस बीमारी को वापस से होने में रोकता है।

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वहीं, अगर चीन के वुहान शहर की बात करें तो यहां यह आंकड़ा हर 10 लोगों में से एक व्यक्ति का है। हालांकि, इस दौरान इम्यून (प्रतिरक्षा) आबादी का अनुपात बहुत कम है। आसान भाषा में समझें तो कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या के मुकाबले ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है, जिनके अंदर इस बीमारी से लड़ने का एंटी बॉडी पैदा हो चुकी है। यही कारण है कि 'हर्ड इम्यूनिटी' के बढ़ने की दर अभी बहुत धीमी है।

कई देशों के आंकड़ों के अनुसार, यह साफ है कि केवल पांच से 10 फीसदी लोगों का एक छोटा सा हिस्सा इस वायरस के संपर्क में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि टीके के बिना 'हर्ड इम्यूनिटी' को पाना मुश्किल होगा। ऐसे में कोरोना वायरस से बीमार या मरने वाले लोगों की संख्या अधिक हो सकती है।

क्या होता है  'हर्ड इम्यूनिटी'

अब आप सोच रहे होंगे कि 'हर्ड इम्यूनिटी' होता क्या है? तो इसे सीधे भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि, 'हर्ड इम्यूनिटी' के कारण किसी भी आबादी में एक बीमारी से लड़ने की ताकत पैदा हो जाती है। जैसे मान लीजिए कि 50 लोगों में 30 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए। अब इन 30 में से 20 लोग पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं तो इनके अंदर पैदा हुई एंटी बॉडी आस पास के लोगों में भी वो ताकत पैदा करने लगती है, जिससे उनका शरीर एक वायरस से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी कोरोना वायरस के खिलाफ 'हर्ड इम्यूनिटी' को पाने में काफी समय लग सकता है।

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