हेमा समिति की रिपोर्ट को लेकर केरल में लगातार विवाद जारी है। अब हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट के खुलासे के बाद दर्ज मामलों की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। बता दें, अदालत ने यह फैसला शिकायतकर्ताओं को मिल रही धमकी भरे संदेशों की जांच के लिए लिया है।
हेमा समिति की रिपोर्ट केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को सौंपे जाने के पांच साल बाद 19 अगस्त, 2024 को जारी की गई थी। चौंकाने वाली रिपोर्ट में शोषण, यौन उत्पीड़न, सत्ता के दुरुपयोग और लॉबिंग के बारे में काले कारनामे सामने आए। रिपोर्ट जारी होने के बाद से ही कुछ महिलाएं अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ यौन दुराचार के आरोप लगाने के लिए आगे आईं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल मामला 14 फरवरी, 2017 का है। जब एक लीडिंग मलयालम अभिनेत्री के साथ उन्हीं की कार में यौन उत्पीड़न किया गया था। वो उस वक्त अपने घर से कोच्चि जा रही थीं। इस दौरान कुछ लड़कों के एक समूह ने उन्हें अगवा कर लिया था और यौन उत्पीड़न किया। इस घटना की खबर आग की तरह पूरे राज्य में फैल गई थी। इससे लोग न केवल परेशान थे बल्कि काफी गुस्से में दिखाई दिए। आरोपियों का मकसद पीड़िता को ब्लैकमेल करना था। हालांकि, 10 आरोपियों में से छह को कुछ दिनों के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि, पॉपुलर एक्टर दिलीप को जुलाई में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की सुनवाई साल 2020 से चल रही है।
घटना के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के ही कई लोगों ने इस मामले पर आवाज उठाई। वहीं, महिलाओं के साथ होने वाले भेदभावपूर्ण व्यवहार पर सबकी नजर पड़ी, जिसके बाद गठित वूमन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) ने मुख्यमंत्री को एक याचिका दी थी। इस दौरान इंडस्ट्री में जेंडर इश्यू पर जांच की मांग की गई थी। घटना के बाद पांच महीने का वक्त बीत चुका था. फिर जुलाई 2017 में राज्य सरकार ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न और जेंडर इनइक्वालिटी के मुद्दों पर विचार करने के लिए तीन सदस्यों की कमेटी का गठन किया। यह कमेटी रिटायर्ड केरल हाईकोर्ट जस्टिस के हेमा की अध्यक्षता में गठित हुई।
क्या है हेमा समिति रिपोर्ट?
इस समिति के तहत आयोग ने इंडस्ट्री में कई महिला प्रोफेशनल से बातचीत की। इस दौरान यौन उत्पीड़न, मजदूरी पर कीमत और काम से ब्लैकलिस्टिंग करने समेत दूसरे मुद्दों के बारे में रिकॉर्ड दर्ज किए गए। साल 2019, दिसंबर को मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को 300 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें इन सभी मुद्दों को सपोर्ट करने के लिए डॉक्यूमेंट्स, ऑडियो और वीडियो के एविडेंस शामिल थे। आयोग ने इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच के मुद्दों को उठाया, जबकि फिल्म सेट पर शराब और ड्रग्स का इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी रिपोर्ट की गई थी। इस पर समिति ने रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों की जांच के लिए एक न्यायाधिकरण के गठन की सिफारिश की।
रिपोर्ट जारी करने में हुई देरी
लगभग तीन साल तक इसे जारी करने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान यह कहा गया कि आयोग को जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत नियुक्त नहीं किया गया था। WCC और दूसरे संगठनों ने इन सालों में कई आग्रह किए। मगर इसके बावजूद सरकार ने रिपोर्ट को जारी करने से इनकार कर दिया था। कल्चरल अफेयर्स मिनिस्टर साजी चेरियन ने विधानसभा को बताया था कि ऐसा करने से कई रेस्पोंडेंट की प्राइवेसी का उल्लंघन होगा।
जनवरी 2022 में राज्य सरकार ने एक पैनल का गठन किया। मई 2022 में एक रिपोर्ट जारी की गई। इनमें जिन चीजों पर ध्यान दिया गया, वो है- इस सेक्टर में जॉब के कॉन्ट्रैक्ट को अनिवार्य बनाना, जॉब पर सभी जेंडर के लिए एक जैसे पैसे होना, शूटिंग लोकेशंस पर ड्रग्स और शराब के इस्तेमाल पर रोक और इस लोकेशंस पर महिलाओं के लिए सेफ वर्किंग कंडीशन रखना शामिल है।