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Railways:तेज बारिश से नहीं थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, मानसून से पहले रेलवे ने शुरु की ये बड़ी तैयारी

Mon, 15 Jun 2026 05:59 PM IST
Rahul Kumar डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मानसून के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में होने वाली तेज बारिश रेलवे संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। खासकर रात के समय खराब मौसम के कारण ट्रेन परिचालन प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसे देखते हुए रेलवे ने मानसून से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए कई अहम तैयारियां शुरू कर दी हैं।
 
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भारतीय रेलवे। - फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
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तेज बारिश के कारण ट्रेन के सिग्नल प्रणाली में होने वाली तकनीकी दिक्कतों को को दूर करने के लिए रेलवे ने व्यापक स्तर पर सुरक्षा उपाय शुरु कर दिए है। पश्चिम रेलवे ने अपने मंडल में स्थापित कुल 2,474 सिग्नल उपकरणों में से 1860 पर विशेष वाटरप्रूफ प्लास्टिक कवर लगाने का काम शुरू करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बारिश और नमी के कारण होने वाली तकनीकी बाधाओं को रोकना और ट्रेन संचालन को सुचारु बनाए रखना है।

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पश्चिम रेलवे के अनुसार, सिग्नल प्रणाली रेलवे सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है, क्योंकि इसी के जरिए ट्रेनों का सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित होता है। इसे देखते हुए कई सेक्शनों में सुरक्षात्मक कवर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि यह कदम मानसून के दौरान सिग्नल प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ ट्रेन सेवाओं को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने में भी मदद करेगा।

दरअसल, मानसून के दौरान बारिश का पानी सिग्नल उपकरणों, केबल बॉक्स और विद्युत प्रणालियों तक पहुंचने पर सिग्नल फेल होने, तकनीकी खराबी आने और ट्रेन संचालन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार इसकी वजह से ट्रेनों के परिचालन में देरी भी हो सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए रेलवे सिग्नल उपकरणों पर विशेष वाटरप्रूफ प्लास्टिक कवर लगा रहा है। ये कवर उपकरणों को बारिश, नमी और पानी के सीधे संपर्क से बचाएंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बरकरार रहेगी और मानसून के दौरान ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारू बना रहेगा।
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रेलवे के मुताबिक, मानसून पूर्व तैयारियों के तहत सिग्नल विभाग ने सभी सिग्नल उपकरणों का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है। इस दौरान उपकरणों की अर्थिंग की जांच की गई और जहां जरूरत महसूस हुई, वहां सुधारात्मक कार्य भी किए गए। इसके अलावा इंटरलॉकिंग पावर सप्लाई सिस्टम का परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया गया है कि मानसून के दौरान भी सिग्नल व्यवस्था को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे और ट्रेन संचालन प्रभावित न हो।

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