प्रचंड गर्मी के बीच इस साल के तापमान कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। गर्मी के कारण त्राहिमाम कर रही जनता राहत की आस लगाए बैठी है। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि बीते तीन महीने में हीट स्ट्रोक के कारण 56 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इकाई- नेशनल सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल (एनसीडीसी) के मुताबिक केवल मई (30 मई) में ही 46 लोगों की मौत हुई है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च से मई के बीच हीट स्ट्रोक के 24,849 संदिग्ध केस रिपोर्ट किए गए। 1 मई से 30 अप्रैल तक 19,189 संदिग्ध हीटस्ट्रोक के मामले सामने आए।
हीट स्ट्रोक के कारण एक ही दिन में 40 संदिग्ध मौतों की खबरें
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के इन आंकड़ों पर एक सूत्र ने कहा कि इस आंकड़े में उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में हुई मौतें शामिल नहीं हैं। वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की आशंका है। बता दें कि देश के बड़े हिस्से में हीटवेव की स्थिति है। गौरतलब है कि भारत में शुक्रवार को अकेले हीट स्ट्रोक से संबंधित कम से कम 40 संदिग्ध मौतों की खबरें अलग-अलग राज्यों से सामने आईं। इनमें से 25 लोगों की मौत उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई।
अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को भी अलग-अलग राज्यों में कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं। हीटवेव के कारण ओडिशा में 10, बिहार में आठ, झारखंड में चार और उत्तर प्रदेश एक शख्स की मौत हुई। राजस्थान में अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत भीषण गर्मी के कारण हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में मध्य प्रदेश में गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण 14 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। महाराष्ट्र में 11 लोगों की मौत हुई है।
एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों से हीट स्ट्रोक से होने वाली मौतों की अंतिम रिपोर्ट फिलहाल नहीं आई है। कुछ राज्यों ने बताया है कि ऑनलाइन डेटा एंट्री में तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक राज्यों से मिले डेटा को अंतिम नहीं माना जा सकता, ऐसे में लू से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के अनुसार रिपोर्ट किए गए मामलों में मृत्यु का कारण हीट स्ट्रोक या हाइपरथर्मिया है। इन मामलों में मौत के समय शरीर का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस से अधिक या उसके बराबर पाया गया। मार्च में एनसीडीसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में लू के कारण होने वाली मौतों की पुष्टि शव परीक्षण के बाद होती है। NCDC के दस्तावेजों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने से पहले कूलिंग का प्रयास किया जाना चाहिए। मानसिक स्थिति में बदलाव और बढ़े हुए लीवर और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी भी हीट स्ट्रोक या हाइपरथर्मिया से मौत का कारण बन सकती है।