फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्मी के भयानक तेवर : हिमाचल तीसरा सबसे ज्यादा लू प्रभावित राज्य, चक्रवाती बारिश व पश्चिमी विक्षोभ न बनने से नियंत्रित नहीं हो पा रहा तापमान

Tue, 26 Apr 2022 06:43 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी आंकड़ों का विश्लेषण कर सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट ने इस बारे में अपनी रिपोर्ट दी है। इसके मुताबिक साल 2022 में 11 मार्च से ही शुरुआती गर्म हवाएं चलने लगी थीं। 24 अप्रैल तक 15 राज्यों में इन्हें दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
गर्मी ने भयानक तेवर। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इस साल मौसम की शुरुआत से ही गर्मी ने भयानक तेवर दिखाए हैं। अब तक 15 राज्यों में गर्म हवाओं को असर नजर आ चुका है। खास बात है कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के बाद हिमाचल प्रदेश ने सबसे ज्यादा हीट वेव भरे दिन देखे हैं, आमतौर पर यह राज्य ठंडा रहता है।

विज्ञापन


11 मार्च से ही चलने लगी थीं गर्म हवाएं

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी आंकड़ों का विश्लेषण कर सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट ने इस बारे में अपनी रिपोर्ट दी है।
  • इसके मुताबिक, साल 2022 में 11 मार्च से ही शुरुआती गर्म हवाएं चलने लगी थीं। 24 अप्रैल तक 15 राज्यों में इन्हें दर्ज किया गया है।


15 राज्यों में इतने दिन चली गर्म हवाएं

राज्य हीट वेव
राजस्थान 25
मध्यप्रदेश 25
हिमाचल 21
गुजरात 19
जम्मू कश्मीर 16
हरियाणा 15
दिल्ली 15
उत्तर प्रदेश 11
झारखंड 11
पंजाब  07
महाराष्ट्र 06
उत्तराखंड 04
गोवा 02
बिहार 02
ओडिशा 01
विज्ञापन

 
40 डिग्री : तापमान मैदानी क्षेत्रों में, तटीय क्षेत्रों में 37 और पहाड़ों में 30 डिग्री पार होने पर मौसम विभाग मानता है कि हीट वेव चल सकती हैं।
6.4 डिग्री : तापमान सामान्य से अधिक हो तो अति गंभीर माना जाता है।
45 डिग्री : के पार तापमान होने पर गर्म हवाएं चलने और 47 डिग्री के पार होने पर ‘अति गंभीर’ गर्म हवा चलने की घोषणा की जाती है।

वजह : बारिश नहीं हुई
कोट्टयम स्थित जलवायु परिवर्तन संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. शिवानंद पाई के अनुसार, राजस्थान सहित देश के पश्चिमी हिस्सों में मार्च में चक्रवाती बारिश नहीं हुई। पश्चिमी विक्षोभ भी नहीं बने। इससे गर्म हवाएं अचानक बढ़ गईं।
विज्ञापन


अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय के जलवायु वैज्ञानिक रघु मुर्तुगुड्डे के अनुसार, भारत में सर्दियों में उत्तर व दक्षिण में मौसमी तनाव का पैटर्न बनता है। यह प्रशांत महासागर में ला नीना प्रभाव की वजह से होता है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें