उच्चतम न्यायालय में राफेल मामले में दिसंबर, 2018 में दायर पुनर्विचार याचिकाओं और राहुल के खिलाफ आपराधिक मानहानि के केस में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राफेल पर सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस सौदे की जांच के आदेश देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
पुनर्विचार याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के मामले में कोई गलत जानकारी अदालत को नहीं दी है।
सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और गैरकानूनी तरीके से हासिल अधूरी आतंरिक नोट के आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर करने वालों ने परजूरी (शपथ लेकर गलत बयान देना) आवेदन दाखिल किया है, लिहाजा इसे खारिज किया जाना चाहिए।
वहीं, याचिकाकर्ताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर सीएजी की रिपोर्ट पर सवाल उठाया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ इस मसले पर सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सरकार ने कहा है कि कानूनन, मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अदालत कोई निर्णय नहीं लेती।
सरकार ने कहा, खरीद निर्णय लेने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है और कई जगहों या अधिकारियों से हो गुजरती है। अपूर्ण आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर परजूरी का आवेदन दाखिल नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट पूरे घटनाक्रम व प्रक्रिया की सही तस्वीर पेश नहीं करती, वह महज प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
सरकार ने कहा है परजूरी आवेदन पूरी तरह से मिथ्या और आधारहीन तथ्यों पर आधारित है और इसके जरिए राफेल विमान के मामले को फिर से खोलने का प्रयास है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 14 दिसंबर को अपना फैसला देकर खत्म कर दिया था।