सुप्रीम कोर्ट सोमवार को वन क्षेत्र से आदिवासियों को बेदखल करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में वन भूमि को उस क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य को नहीं देने और भूमि के गैर कानूनी अधिग्रहण की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने 5 मार्च को छत्तीसगढ़ की तारिका तरंगिनी लारका की याचिका पर संज्ञान लिया था। वकील एमएल शर्मा द्वारा दायर याचिका में लारका ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में अधिकारियों ने आदिवासी भूमि का बड़ा इलाका जबरन हथिया लिया और उसे बाहरी लोगों को दे दिया। अब ये लोग इलाके से आदिवासियों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। याचिका में देशभर में आदिवासियों की जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण की जांच करने के लिए शीर्ष न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की भी अपील की गई है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी को ऐसी ही लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने ही आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें 21 राज्यों को वन भूमि में रहने वाले निवासियों को हटाने का निर्देश दिया था। अधिकारियों ने वन भूमि पर इन लोगों के दावे को खारिज कर दिया था।