सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को न्याय वितरण प्रणाली के अनुभव को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग और मानवीय हस्तक्षेप के बीच एक स्वस्थ संतुलन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहां प्रौद्योगिकी परिवर्तन का सूत्रधार है, वहीं मानव मन ही इसका चालक बना रहेगा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ गुजरात हाई कोर्ट में राज्य की सभी अदालतों के लिए एक ई-कोर्ट फीस प्रणाली के साथ स्थापित एक न्याय घड़ी (जस्टिस क्लॉक) का वर्चुअल उद्घाटन करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बोल रहे थे।
गुजरात हाई कोर्ट 'न्याय घड़ी' वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जहां अदालत परिसर के भीतर एक बाहरी डिस्प्ले एलईडी दीवार होगी जो मामलों के निपटान और लंबित मामलों आदि को प्रदर्शित करता है। इस दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उपयोग और मानव हस्तक्षेप के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। हमें समझना चाहिए कि प्रौद्योगिकी बदलाव का सूत्रधार है, लेकिन बदलाव का चालक मानव मन रहा है और होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम न्याय के मानवीय चेहरे को कभी नहीं भूल सकते हैं, जो सभी तकनीकों के पीछे है। गुजरात हाई कोर्ट की नई पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट, केंद्र और राज्य सरकारों और अन्य सेवा प्रदाताओं के बीच निरंतर विचार-विमर्श, समन्वय और सहयोग के माध्यम से न्यायपालिका की तकनीकी सक्षमता को संभव बनाया गया है।