पान मसाला और दूसरी हानिकारक चीज़ों पर सख्ती बढ़ाने के लिए सरकार का नया कदम संसद की मुहर के बाद अब लागू होने के करीब है। संसद के दोनों सदनों ने हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025 को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत ऐसे उत्पादों के उत्पादन पर अतिरिक्त सेस लगाया जाएगा, ताकि उससे मिलने वाला पैसा जनता की सेहत और देश की सुरक्षा पर खर्च किया जा सके।
राज्यसभा में यह बिल चर्चा के बाद मंजूर हुआ और लोकसभा को वापस भेजा गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह सेस सिर्फ डिमेरिट गुड्स यानी हानिकारक उत्पादों पर लगेगा, जरूरी सामान पर नहीं। उन्होंने बताया कि इस सेस से जुटा पैसा दो अहम क्षेत्रों स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतें पूरी करने में इस्तेमाल होगा। सरकार का दावा है कि यह सेस आम लोगों पर बोझ नहीं डालेगा, बल्कि नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों को हतोत्साहित करेगा।
सेस की जरूरत क्यों?
सरकार के मुताबिक, नई सुरक्षा चुनौतियों के दौर में देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करना जरूरी है। आधुनिक हथियार, ऑटोमैटिक सिस्टम, अंतरिक्ष तकनीक और प्रिसिजन हथियारों पर लगातार और भारी खर्च की जरूरत होती है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस तरह के खर्च के लिए एक भरोसेमंद आय का स्रोत जरूरी है, इसलिए सेस जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य राज्यों का विषय है, इसलिए राज्यों को इसका हिस्सा मिलेगा।
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जीएसटी से टकराव नहीं
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यह सेस GST की व्यवस्था को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पहले GST के साथ मिलने वाला कम्पेनसेशन सेस कई उत्पादों पर कुल टैक्स को 40 से 88 प्रतिशत तक पहुंचा देता था, लेकिन नए ढांचे में अब केवल 40 प्रतिशत की सीमा है। उन्होंने कहा कि नया सेस उत्पादन क्षमता के आधार पर लगाया जाएगा, न कि वास्तविक उत्पादन पर, ताकि टैक्स चोरी न हो सके।
विपक्ष की कड़ी आपत्ति
कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने बिल के नाम की भाषा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिंदी और अंग्रेजी मिलाकर बने शब्द वाले नाम का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने मांग की कि बिल को संसदीय समिति के पास भेजा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैसा कम है, तो फिर नए संसद भवन और प्रधानमंत्री के लिए नए कार्यालय पर इतना खर्च क्यों किया गया। गोहिल ने पान मसाला और गुटखा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग भी दोहराई।
संघवाद और कराधान पर बहस
टीएमसी के साकेत गोखले ने बिल को संघवाद पर हमला बताया और कहा कि सेस से राज्यों को हिस्सेदारी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि सेस का पैसा किस योजना पर कितना खर्च होगा। DMK की कनीमोझी ने भी बिल के नाम में लगे "से" शब्द पर सवाल उठाया और कहा कि 2019 से छह लाख करोड़ रुपये के सेस और सरचार्ज बिना उपयोग के पड़े हैं, ऐसे में नया सेस कैसे भरोसेमंद होगा।
स्वास्थ्य के बोझ का मुद्दा
भाजपा की कविता पाटीदार ने कहा कि हर साल करीब 13.5 लाख लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से मरते हैं। इससे सरकार पर भारी खर्च आता है। उन्होंने कहा कि यह सेस लोगों को तंबाकू से दूर रखने में मदद करेगा। TDP के मस्थान राव यादव बीढ़ा ने कहा कि इससे मिलने वाला पैसा युवाओं में बढ़ती खतरनाक बीमारियों पर रोक लगाने में मदद करेगा। BJD, AIADMK और CPI(M) के नेताओं ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
चर्चा के बाद दिनभर की कार्यवाही खत्म
लंबी बहस के बाद राज्यसभा ने विशेष उल्लेख के तहत सांसदों को अपनी बात रखने का मौका दिया। कई सांसदों ने सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाए। उसके बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। अब बिल पर अंतिम औपचारिकता पूरी होने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा और पान मसाला, गुटखा जैसे उत्पादों पर नया सेस वसूला जा सकेगा, जिसे सीधे देश की सेहत और सुरक्षा पर खर्च किया जाएगा।
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