कैंसर के इलाज का खर्च आम मरीज की पहुंच में लाने के लिए संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने बैठक की। समिति ने कैंसर की सभी दवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर करने की बात कही। इसके अलावा महंगे इलाज को आयुष्मान भारत योजना में अधिक व्यापक रूप से शामिल करने पर जोर दिया।
संसदीय समिति ने क्या कहा?
समिति ने कीमोथेरेपी और इम्युनोथेरेपी जैसे महंगे उपचार को भी आयुष्मान के दायरे में लाने, कैंसर मरीजों के लिए अतिरिक्त उपचार राशि की सुविधा देने की बात भी कही। संसदीय समिति ने कहा कि दवाओं की कीमतों में निर्माता से मरीज तक बढ़ने वाली लागत की जांच होनी चाहिए। कहा कि जो दवा निर्माता स्तर पर कम कीमत में उपलब्ध होती है, वह मरीज तक पहुंचते-पहुंचते कई गुना महंगी हो जाती हैं। नजर रखने के लिए विशेष कोड लगाने का सुझाव भी दिया।
आयुष्मान में कैंसर के महंगे उपचार का दायरा बढ़ाने पर जोर:
स्वास्थ्य मंत्रालय को कैंसर मरीजों के लिए आयुष्मान योजना के तहत विशेष टॉपअप देने की बात कही। कीमोथेरेपी, इम्युनोथेरेपी जैसे महंगे उपचारों का पूरा खर्च इस योजना के दायरे में लाने को कहा।