कोरोना जांच के लिए अब डॉक्टर की सलाह की जरूरत नहीं पड़ेगी। जल्द ही ऐसी व्यवस्था होने जा रही है, जिससे कोई भी व्यक्ति संक्रमण से जुड़ी जांच करा सकता है। फिलहाल फीवर क्लीनिक में दिखाने और डॉक्टर की पर्ची पर ही जांच की जा रही थी। कंटेंमेंट व बफर जोन के साथ हाईरिस्क जोन में आने वालों की सीधे टेस्टिंग हो रही थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को दिए आदेश में स्पष्ट किया है कि देश में अभियान के तौर पर जांच होनी चाहिए। आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्यों में दैनिक जांचों, कुल लैब और उनकी क्षमता की समीक्षा करने पर पाया कि कुछ राज्य पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
जैसे कि एक राज्य की 50 लैब में रोज 20 हजार सैंपल की जांच हो सकती है, वहां 10 से 12 हजार जांचें हो रही है। आईसीएमआर की सिफारिशों पर मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिख जल्द से जल्द जांच बढ़ाने के लिए कहा है। आईसीएमआर के अनुसार, देश में रोज टेस्टिंग की क्षमता साढ़े तीन लाख है, जबकि 2 से 2.30 लाख सैंपल की ही जांच हो पा रही है।