केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि टीकाकरण को लेकर कुछ राज्यों में जिला प्रशासन और निजी अस्पतालों में टीका खरीद में गड़बड़ी देखने को मिली है। इसे गंभीर चिंता का कारण मानते हुए मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिवों से स्थिति में सुधार की अपील की है।
बुधवार को देश के 15 राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में भारत बायोटेक और सीरम कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रतिनिधियों ने बताया कि कई राज्य या फिर प्राइवेट अस्पतालों ने वैक्सीन का भुगतान नहीं किया है। जबकि मांग की गई मात्रा और उनकी खरीद के भुगतान के बीच का अंतर शून्य रखने के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। जबकि कुछ प्राइवेट अस्पताल ऐसे भी हैं जिन्होंने वैक्सीन का ऑर्डर कर दिया, लेकिन जब उनके इलाके तक वैक्सीन पहुंच गई तो उसे अब तक नहीं लिया है।
वैक्सीन को लेकर इस तरह की कई परेशानियां सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने भी हैरानी व्यक्त की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य और प्राइवेट अस्पतालों को पिछले छह महीने से एक जैसे सिस्टम का अनुसरण करने के लिए कहा जा रहा है। बार-बार उन्हें कोविन वेबसाइट और खुराकों के प्रबंधन के लिए जानकारी दी जा रही है। पांच बार मंत्रालय की ओर से प्रशिक्षण भी किया जा चुका है। इसके बाद भी टीकाकरण को लेकर कुछ राज्य या फिर अस्पतालों से ऐसी समस्याएं सामने आना दुर्भाग्यपूर्ण है।
बैठक में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के टीकाकरण से जुड़े अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रें सिंग के जरिये मौजूद थे।
इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि कई निजी टीकाकरण केंद्रों ने वैक्सीन की निर्धारित मात्रा के लिए कोई मांगपत्र नहीं दिया है। कई राज्य सरकारों को इन केंद्रों द्वारा वैक्सीन खरीद की सुविधा प्रदान भी नहीं की गई है। इतना ही नहीं राज्यों से कहा गया था कि दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई थी कि निर्धारित मात्रा के लिए मांग जल्दी से निजी वैक्सीन निर्माताओं के पास रखी जाए लेकिन इस पर भी ध्यान नहीं है।