केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइसेज रूल्स-2017 की अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के बाद मेडिकल डिवाइसों की गुणवत्ता में सुधार आने के साथ-साथ कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
अधिसूचना के मुताबिक मेडिकल डिवाइसों को ए, बी, सी और डी चार श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी में अलग-अलग प्रकार के मेडिकल डिवाइस को शामिल किया गया है और सभी के लिए अलग नियम तैयार किए गए हैं। मेडिकल डिवाइस तैयार करने वाली कंपनियों को स्टेट लाइसेंसिंग ऑथरिटी में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। कंपनियों की ओर से तैयार किए जा रहे मेडिकल डिवाइसों पर नियंत्रण के लिए थर्ड पार्टी के पास ऑडिट करने की जिम्मेदारी होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव केएल शर्मा ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद इस क्षेत्र में भारत में निवेश बढ़ेगा। मेडिकल डिवाइसों का प्रोडक्शन बढ़ेगा और इससे न सिर्फ देश की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी बल्कि निर्यात भी किया जा सकेगा। कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है और इससे मेडिकल डिवाइसों की कीमतों में कमी भी आने की उम्मीद है। इस फैसले से देश में नौकरी बढ़ेगी।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. जीएन सिंह का कहना है कि मरीजों और जरूरतमंदों को सस्ती और अच्छी क्वालिटी के मेडिकल डिवाइस मिलने में मदद मिलेगी। स्टेंट, नी, पेस मेकर, हार्ट वॉल्व के अलावा स्टेथेस्कोप, थर्मामीटर, वॉकर, बैसाखी, मेडिकल स्टीक, हड्डी के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सहायक मेडिकल डिवाइसों सहित दूसरे अन्य मेडिकल डिवाइसों की कीमतों पर न सिर्फ अंकुश लगेगा बल्कि उनकी गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।