सरकार आयुष जैसे वैकल्पिक इलाज पर जोर दे रही है। इसको देखते हुए भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा कंपनियों को आयुष (आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथ) उपचार को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में कवर करने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का लाभ लेने के लिए कम-से-कम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती होना जरूरी
हालांकि, कुछ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी आयुष उपचार को पहले से ही कवर देती रही हैं, लेकिन एक सीमा तक। दरअसल, आमतौर पर आयुष प्रणाली में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से इलाज होता है। लेकिन कुछ विशिष्ट बीमारियों के इलाज में दवाओं का भी इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, आयुष प्रणाली में सामान्य तौर पर मरीज को भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती है, जबकि पॉलिसी का लाभ लेने के लिए कम-से-कम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है।
98 आयुष अस्पताल खोले गए हैं देशभर में जुलाई, 2020 तक
यही वजह है कि सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में आयुष के इलाज पर होने वाले खर्च का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए वित्तीय बोझ से बचने के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय जरूर देख लें कि उसमें आयुष के तहत किस प्रकार के इलाज पर कवर मिलता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल डाटा के मुताबिक, जुलाई, 2020 तक देशभर में 98 आयुष अस्तपाल खोले गए हैं।
आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती भी कवर
दरअसल, 1 अप्रैल, 2020 को पेश आरोग्य संजीवनी के तहत स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को अपनी पॉलिसी में आयुष उपचार को शामिल करना जरूरी है। इसके तहत आयुष उपचार के लिए मिलने वाली सुविधाएं इस बात पर निर्भर करेंगी कि आपने जो पॉलिसी खरीदी है, उसमें यह कवर है या नहीं। इसमें आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती का खर्च भी कवर होगा, जैसे सामान्य परिस्थितियों में होता है।
प्री-पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन भी कवर
जानकारों का कहना है कि कुछ बीमारियों के मामले में आधुनिक इलाज के मुकाबले आयुष सस्ता पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए विभिन्न पॉलिसी में अलग-अलग सीमाएं हैं। आमतौर पर आरोग्य संजीवनी में आयुष उपचार के लिए कम-से-कम 50,000 रुपये का कवर मिलता है। ऊपरी लिमिट की सीमा नहीं है।
हालांकि, कुछ स्वास्थ्य बीमा कंपनियां आयुष के लिए अधिकतम 50,000 रुपये का कवर देती हैं। आरोग्य संजीवनी के तहत आयुष के उपचार में प्री-हॉस्पिटलाइजेशन (भर्ती से 30 दिन पहले तक) और पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन (डिस्चार्ज के 60 दिन बाद तक) खर्च भी शामिल है।
आयुष उपचार के लिए सीमाएं-
बीमा कंपनियों के लिए
- सबसे बड़ी चुनौती है योग्य आयुष चिकित्सकों की पहचान करना।
- वैकल्पिक इलाज के संबंध में दुरुपयोग की आशंका।
- उस जगह (अस्पताल) की पहचान करना बड़ी समस्या, जहां उचित (साक्ष्य आधारित) और बेहतर इलाज की सुविधा।
- आयुष उपचार में इस्तेमाल दवाओं के प्रभाव और गुणवत्ता निर्धारण के लिए अध्ययन पर सवाल।
पॉलिसीधारकों के लिए
- होम्योपैथी, यूनानी या आयुर्वैद जैसे वैकल्पिक उपचार के लिए मरीज को भर्ती नहीं होना पड़ता है, जबकि बीमा का लाभ पाने के लिए कम-से-कम 24 घंटे भर्ती होना जरूरी।
- आयुष उपचार के संबंध में परामर्श पर होने वाले खर्च पर कवर नहीं।
- आरोग्य संजीवनी में आयुष के लिए 5 फीसदी को-पे की सीमा यानी कुल इलाज खर्च का 5 फीसदी का भुगतान करना होगा।
- कमरे के किराये पर 2 फीसदी सब-लिमिट है यानी बीमा कंपनी कमरे के किराये का सिर्फ दो फीसदी ही भुगतान करेगी। (इलाज से लेकर अन्य खर्च की गणना आमतौर पर कमरे के किराये के आधार पर होती है।)
आयुष पर कितना कवर मिलता है
आयुष के तहत आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथ जैसे वैकल्पिक उपचार आते हैं। ऐसे में वित्तीय बोझ से बचने के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदते समय यह जरूर देखना चाहिए कि उसमें आयुष उपचार शामिल है या नहीं। आयुष में भी आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथ पर कवर है या नहीं। इसके अलावा, संबंधित स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में आयुष पर कितना कवर मिल रहा है। - गुरदीप सिंह बत्रा, प्रमुख (रिटेल अंडरराइटिंग), बजाज अलियांज जनरल इंश्योरेंस