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सेहत: ताजी सब्जियां, फल और मेवे स्वास्थ्य लक्ष्यों के लिए बेहतर, घट सकता 30% उच्च रक्तचाप व हृदय रोग का खतरा

Sat, 18 Oct 2025 06:09 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

स्वस्थ जीवनशैली की खोज में भूमध्यसागरीय आहार एक वैश्विक मॉडल बन गया है। ताजे फल-सब्जी, साबुत अनाज, जैतून तेल, मछली और मेवों पर आधारित यह डाइट हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मेटाबॉलिक समस्याओं को कम करने में असरदार मानी गई है। हार्वर्ड रिपोर्ट बताती है कि इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी लचीलापन और व्यक्ति विशेष की जरूरतों के अनुसार अनुकूलता।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Google Gemini
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विस्तार
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स्वस्थ जीवनशैली की तलाश में दुनिया भर में चर्चित मेडिटरेनियन डाइट यानी भूमध्यसागरीय आहार अब सिर्फ एक पारंपरिक खानपान पद्धति नहीं, बल्कि विज्ञान द्वारा प्रमाणित एक लचीला स्वास्थ्य सूत्र बन चुका है। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डाइट इतना अनुकूलनीय (एडाप्टेबल) है कि इसे व्यक्ति की विशिष्ट जरूरतों जैसे उच्च रक्तचाप, पुराना दर्द, हृदय रोग या मेटाबॉलिक समस्याओं के अनुरूप ढाला जा सकता है।

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जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन में प्रकाशित रिपोर्ट कहती है कि भूमध्यसागरीय क्षेत्र के देशों जैसे इटली, ग्रीस और स्पेन की पारंपरिक भोजन शैली पर आधारित यह आहार अब विश्व स्तर पर स्वास्थ्य सुधार के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें प्रमुख रूप से ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, जैतून का तेल, मछली, दालें और मेवे शामिल हैं। रिपोर्ट कहती है कि इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लचक है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस आहार को व्यक्ति के स्वास्थ्य लक्ष्यों और स्थानीय खाद्य उपलब्धता के हिसाब से बदला जा सकता है।

हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की पोषण विशेषज्ञ डॉ. एलिस लैंगर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, मेडिटरेनियन डाइट कोई सख्त फॉर्मूला नहीं एक फ्रेमवर्क है जिसे व्यक्ति अपने शरीर और जीवनशैली के हिसाब से सहज रूप में ढाल सकता है। शोध से यह सिद्ध हुआ है कि इस डाइट से हृदय रोगों का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक घट सकता है, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों नियंत्रित रहते हैं, क्रॉनिक दर्द और सूजन  में उल्लेखनीय कमी आती है और लंबे समय तक संज्ञानात्मक स्वास्थ्य (कॉग्निटिव हेल्थ) बेहतर बना रहता है। वहीं, नवीनतम अनुसंधान अब यह जांच रहे हैं कि यदि इसमें माइक्रो-ट्वीक किए जाएं जैसे कुछ विशेष बीज, किण्वित खाद्य पदार्थ या प्रोबायोटिक्स जोड़े जाएं तो यह आहार मधुमेह और हॉर्मोनल असंतुलन जैसी बीमारियों पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।
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व्यक्तिगत जरूरतों के मुताबिक डाइट में बदलाव
रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि इस डाइट को चार प्रमुख स्वास्थ्य चिंताओं के अनुसार अलग-अलग ढंग से अपनाया जा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर के लिए कम सोडियम, अधिक जैतून तेल और पोटेशियम युक्त सब्जियां। हृदय स्वास्थ्य के लिए मछली, अखरोट अलसी बीज एवोकाडो जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर तत्व। पुराने दर्द (क्रॉनिक पेन) के लिए हल्दी, टमाटर, और फाइबरयुक्त भोजन जो सूजन घटाएं और मेटाबॉलिक और वजन नियंत्रण के लिए साबुत अनाज, दालें और सीमित डेयरी उत्पाद सबसे बेहतर डाइट है।

वैश्विक प्रसार
भूमध्यसागरीय देशों से शुरू हुई यह परंपरा अब भारत, जापान, अमेरिका और मध्य पूर्व तक फैल चुकी है। कई देशों में लोग अपने स्थानीय खाद्य पदार्थों को इसमें शामिल कर इसे न्यू-मेडिटरेनियन डाइट के रूप में अपना रहे हैं। जैसे मूंगफली तेल की जगह ऑलिव ऑयल और मसूर-दाल या छोले को प्रोटीन स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

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