प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना गीता रामचंद्रन ने अमर उजाला से कहा कि अपने काम के सिलसिले में उन्हें लगातार दूर-दराज क्षेत्रों में जाना पड़ता है, लेकिन दुर्भाग्य है कि महिलाओं को कार्यक्रम के लिए बुलाने के बाद भी कई जगहों पर सैनिटरी नैपकिन की व्यवस्था नहीं होती जबकि यह बात सबको मालूम है कि हर महिला को हर महीने में चार से पांच दिन इस परिस्थिति से गुजरना पड़ता है। रामचंद्रन के मुताबिक, टेबल पर सिगरेट की राख रखने के लिए ऐश ट्रे तो हर जगह देखने को मिल जाते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए इतनी सामान्य चीजों का न होना उन्हें बहुत परेशान करता है और कई बार इसके कारण उनकी टीम के सदस्यों को बहुत असुविधा का सामना करना पड़ता है।