स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत में सांप के काटने के मामलों और इससे होने वाली मौतों को 'सूचित करने योग्य बीमारी' (नोटिफिएबल डिजीज) घोषित किया है। केंद्र ने सभी राज्यों से सर्पदंश के मामलों और मौतों को "सूचित करने योग्य रोग" बनाने का भी आग्रह किया है।
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं (मेडिकल कॉलेजों सहित) के लिए सभी संदिग्ध, संभावित सर्पदंश के मामलों और मौतों की रिपोर्ट करना अनिवार्य हो जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने एक पत्र में कहा कि सर्पदंश सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है और कुछ मामलों में, वे मृत्यु, रुग्णता और विकलांगता का कारण बनते हैं। किसान, आदिवासी आबादी आदि अधिक जोखिम में हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि, सर्पदंश की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के परामर्श से भारत से वर्ष 2030 तक सर्पदंश के रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की है। पत्र में सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं (मेडिकल कॉलेजों सहित) से आग्रह किया गया है कि वे सभी संदिग्ध संभावित सर्पदंश मामलों और मौतों की रिपोर्ट संलग्न प्रारूप में देना अनिवार्य करें। देश में लगभग 90 प्रतिशत सांप काटने के मामलों के लिए कॉमन क्रेट, इंडियन कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जिम्मेदार हैं।
उन्होंने रेखांकित किया कि कार्य योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से संबंधित मौतों को आधा करना है। योजना में सर्पदंश प्रबंधन, नियंत्रण और रोकथाम में शामिल विभिन्न हितधारकों के रणनीतिक घटकों, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को परिभाषित किया गया है। राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत प्रमुख उद्देश्यों में से एक भारत में सर्पदंश के मामलों और मौतों की निगरानी को मजबूत करना है। उन्होंने ने सांप काटने की घटनाओं और मौतों पर सटीक नजर रखने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया।