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कांग्रेस अध्यक्ष बने बगैर राहुल ने संभाली पार्टी की कमान 

Thu, 29 Dec 2016 04:27 AM IST
अनूप वाजपेयी/ नई दिल्ली
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कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी अब राहुल गांधी से ज्यादा दूर नहीं दिखती। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें कई अवसरों पर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के तमाम मौके दे रही हैं। पार्टी नेताओं ने राष्ट्रीय कार्यसमिति में प्रस्ताव लाकर राहुल को पहले ही अपना नेता मान लिया है और अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है।
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सोनिया गांधी ने राहुल की ताजपोशी पर हालांकि आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है लेकिन खुद को पीछे कर राहुल को वो सभी मौके दे रही हैं जो उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी के पास ले जा रहे हैं। सोनिया इन दिनों बीमार भी नहीं हैं लेकिन अहम बैठकों में उनकी अनुपस्थिति दिल के किसी कोने में उनकी दबी इच्छा का इजहार कर रही है। वह चाहती हैं कि राहुल को जिस कुर्सी पर बैठना है, वह उस प्रक्रिया के दौर से गुजर कर खुद को परिपक्व नेता के तौर पर साबित कर दिखाएं। 

कांग्रेस के 132वें स्थापना दिवस समारोह में राहुल का झंडा फहराना अचानक नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पहले ही यह फैसला कर लिया था। लिहाजा पहले ही तय था कि राहुल पार्टी का झंडा फहराएंगे और पहली बार इस मौके पर भाषण भी देंगे। ऐसा ही कुछ विपक्षी दलों के नेताओं के साथ हुई बैठक को लेकर भी हुआ, सोनिया नहीं पहुंची। 
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सोनिया स्वस्थ थीं फिर भी नहीं आईं संसद

राहुल और सोनिया गांधी
सोनिया चाहती थीं कि राहुल का तालमेल अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ भी बेहतर हो। सोनिया स्वस्थ थीं और शीतकालीन सत्र के अंतिम दिनों में संसद भी आईं। इसके बावजूद राहुल ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान न सिर्फ कांग्रेस संसदीय दल की बैठक की अध्यक्षता की बल्कि विपक्षी दलों की एकता में भी अहम भूमिका निभाई। 

सोनिया ने फिलहाल राहुल को नेतृत्व की भूमिका साथ खुलकर निखरने का मौका दिया है। पार्टी के भीतर राहुल पर न तो चुनावी नतीजों का दबाव होगा और ही उनकी राजनीतिक भूमिका और पार्टी के कामकाज पर कोई फर्क पड़ेगा। पार्टी कार्यकारिणी की बैठक 11 जनवरी को बुलाई गई है। इसमें वरिष्ठ नेताओं के अलावा सभी सांसदों को आना है। 

समझा जाता है कि इस अहम बैठक में भी राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई जाएगी। राहुल को कहीं न कहीं बहन प्रियंका का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। राहुल के सियासी दौरों और व्यस्तता के दौरान प्रियंका यूपी समेत अन्य बैठकों में शामिल होती हैं। चुनावी राज्यों से जुड़े कार्यक्रमों और संगठन से जुड़े अभियानों की जानकारी अक्सर प्रियंका ले रही हैं।
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