कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी अब राहुल गांधी से ज्यादा दूर नहीं दिखती। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें कई अवसरों पर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के तमाम मौके दे रही हैं। पार्टी नेताओं ने राष्ट्रीय कार्यसमिति में प्रस्ताव लाकर राहुल को पहले ही अपना नेता मान लिया है और अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है।
सोनिया गांधी ने राहुल की ताजपोशी पर हालांकि आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है लेकिन खुद को पीछे कर राहुल को वो सभी मौके दे रही हैं जो उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी के पास ले जा रहे हैं। सोनिया इन दिनों बीमार भी नहीं हैं लेकिन अहम बैठकों में उनकी अनुपस्थिति दिल के किसी कोने में उनकी दबी इच्छा का इजहार कर रही है। वह चाहती हैं कि राहुल को जिस कुर्सी पर बैठना है, वह उस प्रक्रिया के दौर से गुजर कर खुद को परिपक्व नेता के तौर पर साबित कर दिखाएं।
कांग्रेस के 132वें स्थापना दिवस समारोह में राहुल का झंडा फहराना अचानक नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पहले ही यह फैसला कर लिया था। लिहाजा पहले ही तय था कि राहुल पार्टी का झंडा फहराएंगे और पहली बार इस मौके पर भाषण भी देंगे। ऐसा ही कुछ विपक्षी दलों के नेताओं के साथ हुई बैठक को लेकर भी हुआ, सोनिया नहीं पहुंची।