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Banking: एचडीएफसी बैंक में अध्यक्ष के इस्तीफे के बावजूद आंकड़े मजबूत, Q4 में अन्य बैंकों का ऋण जमा पर भारी

Sat, 04 Apr 2026 10:01 PM IST
Kumar Vivek न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा और Q4 नतीजों में आईडीबीआई, कोटक महिंद्रा व एयूएसएफबी के लोन व डिपॉजिट ग्रोथ का पूरा विश्लेषण आसान भाषा में पढ़ें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4) में भारतीय बैंकिंग सेक्टर की दो अलग-अलग तस्वीरें उभरकर सामने आई हैं। एक तरफ देश के दूसरे सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक के जमा (डिपॉजिट) में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन चेयरमैन के अचानक इस्तीफे ने इसके कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ, आईडीबीआई बैंक, कोटक महिंद्रा और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में तेजी से बढ़ता लोन वितरण उनकी जमा राशि की वृद्धि दर को पीछे छोड़ता दिख रहा है।

एचडीएफसी बैंक: मजबूत आंकड़े, लेकिन नेतृत्व में संकट

मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में HDFC बैंक का कुल क्रेडिट (ऋण) 12 प्रतिशत बढ़कर 29.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। बैंक की कुल जमा राशि 14.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 31.05 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इसी अवधि में चालू व बचत खाता (CASA) डिपॉजिट 12.3 प्रतिशत बढ़कर 10.6 लाख करोड़ रुपये और सावधि जमा 15.5 प्रतिशत की उछाल के साथ 20.45 लाख करोड़ रुपये रहा। 

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इन मजबूत वित्तीय आंकड़ों के बीच बैंक को 18 मार्च को तब बड़ा झटका लगा, जब इसके पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 'नैतिक चिंताओं' का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया। बैंक के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने अपना कार्यकाल बीच में ही छोड़ दिया हो। 17 मार्च को लिखे अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट किया, "पिछले दो वर्षों में मैंने बैंक के भीतर जो कुछ घटनाएं और प्रथाएं देखी हैं, वे मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं"। पूर्व आईएएस अधिकारी चक्रवर्ती को मई 2021 में नियुक्त किया गया था और हाल ही में उनका कार्यकाल मई 2027 तक बढ़ाया गया था। उनका कार्यकाल पैरेंट कंपनी HDFC लिमिटेड के बैंक में रिवर्स मर्जर की ऐतिहासिक प्रक्रिया का गवाह रहा है।

आईडीबीआई और कोटक में जमा पर भारी पड़ा क्रेडिट

एचडीएफसी बैंक से इतर, अन्य प्रमुख बैंकों में क्रेडिट (लोन) और डिपॉजिट वृद्धि के बीच का अंतर बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है:

  • आईडीबीआई बैंक: एलआईसी के नियंत्रण वाले इस बैंक का लोन ग्रोथ चौथी तिमाही में 16 प्रतिशत बढ़कर 2.53 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ केवल 12 प्रतिशत (3.46 लाख करोड़ रुपये) ही रही। बैंक का कुल कारोबार 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
  • कोटक महिंद्रा बैंक: इस बैंक ने एडवांस (ऋण) में 16.2 प्रतिशत की वृद्धि (4.95 लाख करोड़ रुपये) दर्ज की, जबकि कुल जमा राशि में 14.7 प्रतिशत (5.72 लाख करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी हुई।
  • एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक: बैंक ने एडवांस में 25.1 प्रतिशत की जोरदार उछाल (1.36 लाख करोड़ रुपये) दर्ज की। इसके मुकाबले जमा राशि 22.8 प्रतिशत बढ़कर 1.52 लाख करोड़ रुपये रही। विशेष रूप से बैंक का कम लागत वाला कासा (CASA) अनुपात मार्च 2025 के 29.2 प्रतिशत से गिरकर 28.4 प्रतिशत पर आ गया है।

चौथी तिमाही के ये नतीजे साफ तौर पर दर्शाते हैं कि तेज ऋण मांग को पूरा करने के लिए सस्ती जमा राशि जुटाना अब भी बैंकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही, HDFC बैंक के शीर्ष नेतृत्व में हुआ यह अप्रत्याशित घटनाक्रम बताता है कि वित्तीय मजबूती के साथ-साथ संस्थागत शासन और नैतिकता को बनाए रखना भी निवेशकों के विश्वास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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