मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग (ईसी) को 31 जुलाई तक तमिलनाडु की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने से रोक दिया। इन सीटों पर 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के तुरंत बाद इस्तीफा दे दिया था। इन पांच सीटों में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा सीट भी शामिल है।
चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी अरुलमुरुगन की प्रथम पीठ ने यह अंतरिम आदेश दिया। पीठ ने वकील के वेंकटचलपति की ओर से दायर जनहित याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है।
पीठ ने विजय और अन्य पक्षों को तीन हफ्तों के भीतर सभी तथ्यों और कानूनी दावों के साथ विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस्तीफा देने वालों में विजय के अलावा, करूर से एमआर विजयभास्कर, विरालिमलाई से सी विजयभास्कर, पेरुंदुरई से एस जयकुमार और अंबासमुद्रम विधानसभा सीट से इस्तीफा देने वाले एसाकी सुब्बैया शामिल हैं।
याचिका में क्या मांग की गई?
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि तमिलनाडु विधानसभा के 2026 के चुनाव में विभिन्न उम्मीदवारों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों को जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत उपचुनाव कराने के लिए 'स्पष्ट रिक्त सीट' या उपलब्ध सीट नहीं माना जाए।
सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि शीर्ष कोर्ट ने माना है कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत किसी सदस्य का इस्तीफा स्वीकार होने से बनी अस्थायी रिक्ति अपने आप उस सीट को 'स्पष्ट या उपलब्ध रिक्त सीट' नहीं बना देती।
पीठ ने कई अहम बातों को सामने रखा। पहली नजर में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि अगर चुनाव याचिका में याचिकाकर्ता ने खुद को निर्वाचित घोषित करने की मांग भी की है, तो उस सीट को उपचुनाव के लिए 'स्पष्ट रिक्त सीट' नहीं माना जा सकता।
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पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता से जुड़े मामलों में याचिका दाखिल करने के अधिकार को लेकर बहुत सीमित और केवल तकनीकी नजरिया नहीं अपनाया जा सकता।
चुनाव लड़ रहे प्रतिवादियों के वकील ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता इन विधानसभा क्षेत्रों का मतदाता नहीं है, इसलिए उसे याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, पीठ ने कहा कि रिक्त सीट बनने की तारीख और चुनाव याचिका दाखिल करने की तारीख के बीच संबंध से जुड़ी दलीलों पर अभी और विचार करना जरूरी है।