1000 और 500 के बड़े नोटों की नोटबंदी ने जम्मू-कश्मीर में आतंक फैला रहे लोगों और देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद नक्सलियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में मौजूद आतंकवादियों और दूसरे अलगाववादियों को हवाला कारोबार के जरिए ज्यादातर 500 और 1000 के नोट के रुप में पैसा मुहैया कराए जाता रहा हैं। नोटबंदी के बाद यह बिल्कुल ही रुक गया है।
इसके साथ ही बिहार और झारखंड में काम कर रहे नक्सलियों के ग्रुप इस समय परेशान हैं। लोगों से उगाही के रूप में मिले 500 और 1000 के डाइमेंशन के रुपए को लीगल करने में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में एक खुफिया अधिकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि 500 और 1000 के पुराने नोट पर प्रतिबंध के बाद हवाला कारोबार में सन्नाटा छा गया है। घाटी में प्रदर्शन और हिंसा के लिए किसी भी तरह की नकदी नहीं दी जा रही है। इसके साथ ही उपद्रवियों को शांत रहने के लिए कहा जा रहा है। इसके साथ ही उनके पास ज्यादे पैसे नहीं है कि वे वहां के युवाओं को पत्थरबाजी और दूसरे हिंसक प्रदर्शन के लिए दे सकें।