विधि आयोग ने 2017 में अपनी रिपोर्ट में भड़काऊ भाषण की व्याख्या की थी और भारतीय दंड संहिता और अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 153-सी और 505-ए शामिल करने की सलाह दी थी। याचिका में कहा गया है कि भड़काऊ भाषण के चलते सामाजिक सद्भाव, व्यक्ति की गरिमा, एकता और राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचता है। नफरत वाले बयानों से संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 जैसे मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुंचता है।