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जीएसटी पर उठे सात सवालों का सरकार ने दिया जवाब

Sun, 02 Jul 2017 05:39 PM IST
amarujala.com- written by: संदीप भट्ट
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एक जुलाई को सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी देश में लागू हो गया है। मगर व्यापारियों, छोटे कारोबारियों में और आम लोगों में इस कर सुधार सिस्‍टम को लेकर कई तरह‌ के कन्फ्यूजन हैं। राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया ने रविवार को जीएसटी के बारे में बनी कुछ गलत धारणाओं को दूर करने की कोशिश की।
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  उन्होंने ट्विटर पर जीएसटी के बारे में बने कुछ कॉमन मिथक और उनकी सच्चाई के बारे में बताया। उन्होंने जीएसटी से जुड़े सात मिथक के बारे में स्थिति स्पष्ट की है।
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मिथक- मुझे सभी बिल कम्प्यूटर/इंटरनेट से बनाने होंगे
हकीकत- बिल को हाथ से भी बनाया जा सकता है

मिथक- जीएसटी के तहत क्या मुझे व्यापार करने के लिए हर समय इंटरनेट की जरूरत होगी?
हकीकत- इंटरनेट की आवश्यकता सिर्फ मासिक जीएसटी रिटर्न फाइल करने के समय होगी।

मिथक- मेरे पास प्रोविजनल आईडी है लेकिन व्यापार करने के लिए फाइनल आईडी का इंतजार कर रहा हूं
हकीकत- प्रोविजनल आईडी आपका फाइनल जीएसटीआईएन होगा। व्यवसाय शुरू कीजिए।

मिथक- मैं जिस वस्तु का व्यापार करता था उसे टैक्स से छूट थी। इसलिए क्या अब मुझे व्यापार शुरू करने से पहले नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा
हकीकत- आप अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और आपको 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

मिथक- हर महीने तीन रिटर्न फाइल करने होंगे
हकीकत- सिर्फ एक रिटर्न है, उसके तीन भाग हैं। इसका पहला भाग डीलर के जरिये फाइल किया जाएगा दो अन्य भाग कम्प्यूटर से ऑटोमेटिक भरा जाएगा।

मिथक- छोटे डीलरों को भी रिटर्न में बिल का विवरण फाइल करना होगा।
हकीकत- जो रिटेल बिजनेस (बी2सी) में हैं उन्हें सिर्फ कुल बिक्री का संक्षिप्त विवरण देना होगा

मिथक- नई जीएसटी दर पहले के वैट की तुलना में अधिक है।
हकीकत- यह अधिक लग रही हैं क्योंकि पहले उत्पाद शुल्क और अन्य कर दिखाई नहीं देते थे और अब वह जीएसटी में समाहित हो गए है और दिख रहे हैं।
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