फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Election Results: क्या राहुल गांधी के 'जातिगत जनगणना' 'आरक्षण' और 'संविधान' जैसे मुद्दों की धार कुंद हो गई

सार

Maharstra Election Results: झारखंड में भी पार्टी करीब डेढ़ दर्जन सीटों के आंकड़े के पार जाती हुई नजर नहीं आ रही। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मोदी का 'एक हैं, सेफ हैं' का नारा, राहुल की रणनीति पर भारी पड़ा है।
विज्ञापन
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महाराष्ट्र और झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के उपचुनाव में राहुल गांधी के उन मुद्दों की धार कुंद होती दिखाई पड़ी है, जिनका जादू लोकसभा चुनाव में देखने को मिला था। 'जातिगत जनगणना' 'ओबीसी' 'आरक्षण' और 'संविधान को खतरा', विधानसभा चुनाव में ये मुद्दे असर नहीं दिखा सके। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद थी कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव की तर्ज पर अब विधानसभा चुनाव में भी राहुल का जादू दिखेगा। महाराष्ट्र में तो कांग्रेस के लिए पिछले चुनाव में जीती 44 सीटों के आंकड़े को छूना भी मुश्किल हो गया है। इस बार पार्टी के खाते में 25 सीटें भी आती हुई नहीं दिख रही। 
विज्ञापन


झारखंड में भी पार्टी करीब डेढ़ दर्जन सीटों के आंकड़े के पार जाती हुई नजर नहीं आ रही। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मोदी का 'एक हैं, सेफ हैं' का नारा, राहुल की रणनीति पर भारी पड़ा है। मोदी ने अपनी प्रचार शैली के जरिए महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी पर यह कहते हुए हमला बोला था कि ये लोग आरक्षण को खत्म करना चाहते हैं। जातिगत जनगणना, लोगों को आपस में बांटने की साजिश है। 

लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन, महाराष्ट्र में 30 सीटें जीतने में कामयाब रहा था। कांग्रेस ने 13 सीटें जीती थी, जबकि भाजपा की जीत का ग्राफ 22 से घटकर 8 पर पहुंच गया था। राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में जबरदस्त तरीके से जातिगत जनगणना, संविधान को खतरा और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाया था। इतना ही नहीं, राहुल ने कहा था, जितनी आबादी उतना हक। 
विज्ञापन


इंडिया गठबंधन की सरकार में आरक्षण की पचास फीसदी सीमा को बढ़ा दिया जाएगा। इसके साथ ही राहुल ने अपने हाथ में संविधान की किताब लेकर लोगों से कहा था, भाजपा संविधान को खत्म कर देगी। अगर ऐसा हो गया तो देश में कुछ नहीं बचेगा। इन नारों की बदौलत राहुल की रैलियों में खूब भीड़ जुटने लगी। यहां तक कि प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित बाकी कांग्रेसी नेताओं ने भी राहुल के मुद्दे उठाकर चुनावी नेरेटिव सेट करने का प्रयास किया। लोकसभा चुनाव में उन्हें कामयाबी भी मिली। पार्टी ने 99 सीटें जीती। 

उसी तर्ज पर राहुल ने महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव में भी वही मुद्दे उठा दिए। उन्होंने नागपुर की रैली में कहा था, 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव कई लोगों के लिए बड़ा टेस्ट साबित होगा। राहुल गांधी ने चुनावी प्रचार के दौरान अपनी रैलियों में संविधान और जातिगत जनगणना का मुद्दा जोरशोर से उठा दिया था। उनकी रैलियों में लोकसभा चुनाव की तरह भीड़ जुटने लगी। कांग्रेस कार्यकर्ता भी जोश में आ गए। उन्हें लगने लगा कि महाराष्ट्र में राहुल के नेरेटिव खेल कर जाएंगे। राहुल ने झारखंड में भी वही मुद्दे उठा दिए। उन्होंने कहा, भाजपा और और संघ, देश के संविधान पर हमला कर रहे हैं। जाति जनगणना से पता चलेगा कि देश में दलितों, ओबीसी और आदिवासियों के साथ किस तरह का अन्याय हो रहा है। 

उन्हें उनकी आबादी के मुताबिक हक नहीं मिल रहा है। इसके लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा की दीवार को तोड़ा जाएगा। महाराष्ट्र में दलितों की आबादी लगभग 12 प्रतिशत है। ओबीसी आबादी की बात करें तो वह करीब 38 फीसदी है। आदिवासी 9 फीसदी हैं और मराठा लगभग 28 प्रतिशत हैं। ऐसे में राहुल को उम्मीद थी कि जातिगत जनगणना और आरक्षण का मुद्दा, कांग्रेस को बंपर वोट दिलाने में सफल होगा।  

दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हरियाणा में पचास प्रतिशत सीटें खोने के बाद विधानसभा के लिए जो रणनीति तैयार की, कुछ वैसी ही महाराष्ट्र के लिए भी तैयार कर दी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इंडिया गठबंधन, भीड़ को देखकर अपनी जीत का अंदाजा लगाने लगा तो वहीं भाजपा ने अपने सहयोगियों के साथ ऐसी रणनीति तैयार की, जिसका पता विपक्ष को नहीं लग सका। जिस तरह से हरियाणा में आखिर तक कांग्रेस को यह लग रहा था कि विधानसभा में 90 में से उसे पचास से अधिक सीटें मिलना तय है। वजह, पार्टी को लोकसभा की दस सीटों में से पांच सीटें मिली थी। हरियाणा के चुनावी नतीजों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल गया। 

कुछ इसी तरह भाजपा ने महाराष्ट्र में चुनावी रणनीति बनाई। लोकसभा चुनाव की गलतियों से सबक सीखा। पीएम मोदी ने राहुल के मुद्दों की काट के लिए 'एक हैं, सेफ हैं' का नारा दे दिया। कांग्रेस ने इस नारे को समाज को बांटने वाला बताया तो दूसरी तरफ पीएम मोदी ने इसे दलित, ओबीसी व आरक्षण से जोड़ दिया। उन्होंने चुनाव प्रचार में कहा, कांग्रेस पार्टी आरक्षण को खत्म कर देगी। इसके लिए वह दलितों और ओबीसी को बांटना चाहती है। पीएम मोदी का यह नारा काम कर गया। 
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें