हरियाणा प्रदेश कांग्रेस छह सालों से बिना जमीनी संगठन के चल रही है। राज्य में पार्टी की दुर्दशा के लिए नेता एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। लेकिन गांधी परिवार के करीब होने के बावजूद पहले पांच साल तक अशोक तंवर और अब कुमारी शैलजा संगठनात्मक ढांचा नहीं खड़ा कर सकीं हैं।
चुनाव के ठीक पहले पार्टी छोड़ने वाले तंवर के बनाए गए पदाधिकारियों को नेतृत्व ने मंजूरी नहीं दी। तंवर चाहकर भी हुड्डा के खिलाफ नेतृत्व को अपने पक्ष में तैयार नहीं कर पाए थे। तंवर के समय जिला और ब्लॉक अध्यक्ष बनाने में सबसे बड़ी बाधा हुड्डा थे।
यही कारण है कि पार्टी छह साल से बिना संगठन के चल रही है। शैलजा करीब एक साल से अध्यक्ष हैं लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं कर सकी हैं। दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा पर केंद्रीय नेतृत्व की नजर रहती है, लिहाजा कोई अध्यक्ष मन मुताबिक संगठन नहीं बना पाता। राज्य के नए प्रभारी विवेक बंसल भी जमीनी संगठन की कमजोरी की बात स्वीकारते हैं। उन्होंने कहा कि दो तीन माह में पदाधिकारी बना लिए जाएंगे।