कैथल की रैली में उन्होंने कहा, कांग्रेस कह रही है कि राफेल की शस्त्र पूजा का तमाशा करने की क्या जरुरत है। राफेल का नाम आते ही राहुल गांधी के पेट में दर्द हो जाता है। अगर कांग्रेस पार्टी को 'राफेल' के पूजा-पाठ में कोई तमाशा दिखता है, तो इसमें दोष इनका नहीं है। असल में उन्हें इटली की संस्कृति ज्यादा पता है, जबकि अपने देश की संस्कृति का कम ही पता है।
लोकसभा चुनाव में 'राफेल' को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच खूब ठनी थी। भाजपा ने इसे देश की सुरक्षा के लिए जरुरी बताते हुए जल्द से जल्द लाने की बात कही, तो कांग्रेस पार्टी ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा को घेरने का प्रयास किया। कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी हर रैली में पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा पर हमला बोला। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन वहां से भी कांग्रेस पार्टी के लिए कोई राहत भरी खबर नहीं आई।
राहुल गांधी ने इतना तक कह दिया कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी की सरकार आती है, तो वे राफेल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कराएंगे। उन्होंने राफेल के मुद्दे पर ही मोदी के लिए 'चौकीदार चोर है' चुनावी टैग लाइन शुरु की थी।
चुनाव से पहले हुई बालाकोट की एयर स्ट्राइक ने पूरा चुनावी माहौल ही पलट दिया। राहुल गांधी का चुनावी नारा 'चौकीदार चोर है' अब 'मैं भी चौकीदार हूं' में बदल चुका था। मोदी ने अपनी रैलियों में कहा, हमने आतंकियों को उनके घर में घुस कर मारा। अगर हमारे पास राफेल होता, तो नतीजे कुछ और ही होते। प्रधानमंत्री के इतना कहते ही कांग्रेस पार्टी की टैग लाइन बदल गई। भाजपा ने गली गली में 'मैं भी चौकीदार हूं' का नारा पहुंचा दिया।