हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा इस बार दागियों और बागियों से परहेज बरतेगी। इस क्रम में सीएम के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले एक दर्जन विधायकों और मंत्री के टिकट पर खतरे की तलवार लटकी हुई है। फिलहाल पार्टी ने 52 सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया है। इनमें डेढ़ दर्जन सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों को उतारे जाने की योजना है। इस क्रम में संघ ने अपनी ओर से आधा दर्जन सीटों पर निष्ठावान नेताओं-कार्यकर्ताओं के नाम सुझाए हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार के चुनाव में गैरराजनीतिक आरोपों से घिरे, अदालती प्रक्रिया का सामना कर रहे और सीएम के खिलाफ अतीत में मोर्चा खोलने वाले ज्यादातर विधायकों और मंत्रियों को टिकट हासिल करने में पसीने छूटेंगे। ऐसे विधायकों और मंत्रियों का शीर्ष स्तर पर तीखा विरोध हो रहा है। इनसे जुड़ी सीटों पर तीन-तीन उम्मीदवारों का पैनल बनाया गया है। गौरतलब है कि सीएम के खिलाफ कुछ वर्ष पूर्व रणधीर सिंह कापरीवास, उमेश अग्रवाल, मूलचंद शर्मा, बिमला चौधरी सहित कई विधायकों ने मोर्चा खोला था।
डेढ़ दर्जन सीटों पर बाहरी उम्मीदवार
पार्टी ने अब तक 52 सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया है। इनमें डेढ़ दर्जन सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की योजना है। सूत्रों का कहना है कि ऐलनाबाद, डबवाली, रतिया, नलवा, जुलाना, दादरी, झज्जर, नूह, पुन्हाना, गन्नौर, नरवाना सहित कई सीटों पर पार्टी के पास कोई अपना मजबूत उम्मीदवार नहीं है। ऐसे में इन सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों को मैदान में उतारना पार्टी की मजबूरी है। इस दौरान संघ की ओर से सुझाए गए नामों को वरीयता दी जाएगी।
अंतिम समय में नेतृत्व खोलेगा पत्ता
सूत्रों के मुताबिक पार्टी 29 सितंबर को करीब चार दर्जन सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर देगी। जिन सीटों पर विधायकों-मंत्रियों के टिकट कटेंगे, उन सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा अंतिम समय में की जाएगी। ऐसा फैसला टिकट न मिलने के कारण विधायकों-मंत्रियों के पाला बदलने का अवसर नहीं देने की रणनीति के तहत किया गया है। पार्टी कम से कम एक तिहाई विधायकों-मंत्रियों के टिकट काटेगी।