उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि अब राज्य को मिले जख्म के भरने का वक्त है। वह इसमें केंद्र से भी सहयोग चाहते हैं। उन्होंने अस्थिरता फैलाने के लिए केंद्र सरकार को कोसा और उत्तराखंड में सरकार गिराने की कोशिश को संघवाद की नीत के खिलाफ बताया। रावत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले और प्रदेश के हालात की जानकारी दी।
दिल्ली पहुंचने पर रावत का पंरपरागत तरीके से भव्य स्वागत हुआ। उनके दिल्ली स्थित आवास पर मेला सा माहौल बना रहा। समर्थक खुशी से झूमते और थिरकते नजर आए। रावत ने संकेत दिए कि बागी विधायकों की कांग्रेस में वापसी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने दो महीने तक तपस्या की है। अब बागी विधायक भी तपस्या करें। भाजपा ने पहले बागी विधायकों पर कई टिप्पणियां की हैं। अब भाजपा चाहे तो उन्हें अपना लें।
रावत ने कहा कि केंद्र सरकार को विपक्ष शासित राज्यों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखना चाहिए। हमें केंद्र से सहयोग की अपेक्षा है। रावत केसाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और चीफ मीडिया कार्निटर धीरेन्द्र प्रताप भी थे। धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि उत्तराखंड मामले में केंद्रीय कानून मंत्री ने राष्ट्रपति को गलत जानकारी दी। इसलिए कानून मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। पूरे प्रकरण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए।