भारत 13 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं के संचालन के लिए अलग से द्विपक्षीय ‘एयर बबल’ समझौता करने के लिए वार्ता चालू कर दी है। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि इन 13 देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान और सिंगापुर भी शामिल हैं।
पुरी ने कहा, दो देशों के बीच द्विपक्षीय एयर बबल समझौते के तहत उनकी एयरलाइंस कुछ प्रतिबंध के साथ एक-दूसरे के यहां हवाई सेवाओं का संचालन कर सकती हैं। पुरी ने ट्विटर पर लिखा कि पड़ोसी देश श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल और भूटान के लिए भी एयर बबल समझौते का प्रस्ताव है।
इससे पहले जुलाई में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और मालदीव के साथ एयर बबल समझौता किया था। उन्होंने कहा, हम अब इस समझौते को आगे बढ़ाते हुए 13 अन्य देशों के साथ इस तरह की व्यवस्था करने के लिए बात कर रहे हैं।
इन 13 देशों में ऑस्ट्रेलिया, इटली, जापान, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, बहरीन, इस्राइल, केन्या, फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड शामिल हैं। पुरी ने कहा, भारत इन 13 देशों के अलावा अन्य देशों के साथ भी ऐसे ही द्विपक्षीय समझौते करेगा। अपने हर फंसे हुए नागरिक तक पहुंचने की हमारी हमेशा कोशिश रही है। कोई भी भारतीय छोड़ा नहीं जाएगा।
भारत में अंतरराष्ट्रीय यात्री विमानों का संचालन कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद 23 मार्च से ही निलंबित चल रहा है। लेकिन करीब दो महीने निलंबन के बाद भारत 25 मई से अपनी घरेलू विमान सेवाएं चालू कर दी थीं। हालांकि दोबारा चालू होने के बाद से भारतीय घरेलू विमान सेवाओं में यात्री दर 50-60 फीसदी के आसपास ही रहा है।
फिलहाल भारत में सभी एयरलाइंस को कोरोना वायरस से पहले चल रही घरेलू सेवाओं के 45 फीसदी हिस्से का ही संचालन करने की इजाजत मिली है। इसके चलते भारत में उड्डयन क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और ज्यादातार एयरलाइंस ने वेतन कटौती, अवैतनिक छुट्टियों और नौकरी से निकालने जैसे कदम उठाकर अपनी लागत घटाने का प्रयास किया है।
क्या होता है एयर बबल
कोरोना महामारी के दौरान सामने आए नए शब्दों में से एयर बबल भी एक है। इसके तहत दो देशों के वैध वीजा वाले यात्री एक-दूसरे के यहां कुछ प्रतिबंधों का पालन करते हुए बिना परेशानी के यात्रा कर सकते हैं। यह यात्राएं बिजनेस और पर्यटन, दोनों के लिए हो सकती हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को यह होता है कि उन्हें गंतव्य पर पहुंचने के बाद 14 दिन के लिए क्वारंटीन नहीं होना पड़ता है। हालांकि एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उनकी सभी जांच की जाती हैं और पूरा ब्योरा लिया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ते ही उन्हें ट्रैक किया जा सके।