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भारतीय राजनयिकों का उत्पीड़न पाक सेना-आईएसआई की करतूत

Sat, 17 Mar 2018 05:31 AM IST
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
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पाकिस्तान में भारतीय राजनयिकों का उत्पीड़न लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं बल्कि वहां की सेना व खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर शुरू हुई है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यूपीए-1 सरकार के शुरुआती दौर में पाकिस्तानी एजेंसियां अचानक भारतीय राजनयिकों को परेशान करने लगी थीं।
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सिंह और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच सकारात्मक बातचीत के बाद रुका वह सिलसिला इस बार फिर शुरू हो गया है। हालांकि भारत-पाक के बीच उपजे तनावपूर्ण हालात में छिटपुट तौर पर आईएसआई और पाक सेना ऐसी हरकतें करती रहती हैं।

पाकिस्तान में दो साल तक भारत के  उच्चायुक्त रहे जी पार्थसारथी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि यह काम पाक की चुनी हुई सरकार और विदेश मंत्रालय का नहीं होता। यह सीधे तौर पर वहां की सेना की करतूत है जो विदेश नीति के मामले में अपनी सरकार की भी परवाह नहीं करते। हालांकि कई बार दोनों सरकारों के सुलह के बाद ऐसी घटनाएं रुक जाती हैं।
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पार्थसारथी के मुताबिक भारत को मजबूरन जैसे को तैसा रवैया अपना कर संदेश देना पड़ता है। ताकि हमारे राजनयिक वहां सुरक्षित रह सकें, लेकिन पाकिस्तान का उनके राजनयिकों के बच्चों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप बिल्कुल निराधार है। भारत में लोकतांत्रिक सरकार है और वियना समझौते का पालन करता है।

पार्थसारथी ने कहा कि 2014 के बाद से भारतीय राजनयिक अपने बच्चे पाकिस्तान नहीं ले जाते। लेकिन भारत में पाक राजनयिक के बच्चे अपने परिवार के साथ सिर्फ सुरक्षित नहीं रहते बल्कि अच्छी शिक्षा भी पाते हैं। पाक सेना और आईएसआई भारत की ऐसी शराफत को कमजोरी समझ लेता है।

यही वजह है कि उन्हें सबक सिखाने के लिए भारत को मजबूर यहां पाक राजनयिकों के खिलाफ सख्ती बरतनी पड़ती है। यह सीधा संदेश होता है कि एक हद के बाद भारत चुप नहीं बैठेगा। 
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क्या करती है आईएसआई-पाक सेना

जैसे को तैसा का असर

इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में लंबा समय गुजारने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि करगिल युद्ध के आसपास महिला राजनयिक रुचि घनश्याम को वहां काफी परेशान किया जा रहा था। तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।

जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा तो दिल्ली में एक पाक महिला राजनयिक की गाड़ी के चारों शीशे तोड़ दिए गए जब वह दूतावास से बाहर निकली थीं। इसका सीधा असर हुआ कि घनश्याम को परेशान करना बंद कर दिया गया। अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान ऐसी ही भाषा समझता है।

इसी तरह 4 जुलाई 1999 को जब नवाज शरीफ करगिल युद्ध की माफी मांगने के नाम पर अमेरिका गए हुए थे तो इस्लामाबाद में एक भारतीय राजनयिक को अगवा कर बुरी तरह मारा पीटा गया। पीएमओ और तत्कालीन एनएसए ब्रजेश मिश्रा ने इस पर संज्ञान लिया। लेकिन कोई असर नहीं हुआ। तब दिल्ली में एक पाक राजनयिक के साथ वैसा ही व्यवहार हुआ तो इस्लामाबाद में हरकत अचानक काबू में आ गई।

क्या करती है आईएसआई-पाक सेना

अधिकारी के मुताबिक देर रात को भद्दी गालियों के साथ डराने वाले फोन कॉल आना, गाड़ी का बिल्कुल सटाकर पीछा करना, होटलों और रेस्तरां में पास के टेबल पर बैठक कर घूरना, आधी रात को कॉल बेल बजाना मानसिक उत्पीड़न के आम हथकंडे हैं।

आम आदमी के भेष में बीच बाजार हमले कराना, महिलाओं को डराना, परिवार की धमकी, कैंपस में पत्थर फेंकना उत्पीड़न के अगले स्तर में आता है। सबसे खराब होता है किसी राजनयिक को अगवा कर उसे मारना पीटना और बीच सड़क पर छोड़ देना।
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