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Madras High Court: हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी की सजा को बरकरार रखा, महिला पुलिस अधिकारी के उत्पीड़न का मामला

Tue, 23 Apr 2024 03:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।

सार

मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उत्पीड़न के एक मामले में तमिलनाडु के पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक राजेश दास को दी गई तीन साल की सजा को बरकरार रखा है।
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Court Room - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को यौन उत्पीड़न के एक मामले में तमिलनाडु के पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक राजेश दास को दी गई तीन साल की सजा को रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम ढांडापानी ने विभिन्न याचिकाओं को खारिज करते हुए दास को निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने से छूट देने से भी इनकार कर दिया। 

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दास को विल्लुपुरम की स्थानीय अदालत ने 2021 में एक महिला आईपीएस अधिकारी का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के लिए दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। 

न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं की गरिमा भंग करने या उनके साथ अभद्र व्यवहार से जुड़े मामलों में अदालतों को आरोपियों की सजा रद्द करते वक्त बहुत चौकस रहना चाहिए और धीमी गति से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है, जो पुलिस बल में बहुत ऊंचे पद पर आसीन था। 
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उन्होंने कहा, पुलिस एक अनुशासित बल है, जिसमें शीर्ष पदों पर बैठें लोगों को उच्च अनुशासन का प्रदर्शन करना चाहिए और उन्हें खुद को देश के नागरिकों के लिए रोल मॉडल के रूप में पेश करना चाहिए। 

न्यायाधीश ने कहा कि मौजूदा मामले में पुनरीक्षण याचिकाकर्ता पर आरोप लगाया गया था कि उसने अपने अधीनस्थ एक महिला कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार किया। जब आम जनता महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करती है तो यह पुलिस अधिकारी कार्रवाई करते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें बिना किसी भय या पक्षपात के अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए उच्च सम्मान की नजर से देखा जाता था। 

न्यायाधीश ने कहा कि यह अदालत सजा को रद्द करने पर विचार कर रही है। लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से बताए गए विरोधाभास सकारात्मक प्रकृति के नहीं थे। इसके अलाव, निचली अदालतों में मामला साक्ष्यों के आधार पर टिका हुआ है। न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के मामलों में अदालत पीड़ित के साक्ष्य पर विचार करने के लिए बाध्य है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि साक्ष्य विश्वसनीय है या नहीं। 

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