कोरोना की वजह से टीबी रोगियों की पहचान में देरी हो रही है। गत जनवरी की तुलना में अप्रैल में 50 फीसदी कम टीबी मरीजों की पहचान हो पाई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जांच में देरी से टीबी रोगियों में मृत्युदर बढ़ने का अंदेशा है। हर राज्य के लिए सालाना लक्ष्य निर्धारित किया जाता है।
जून खत्म होने को है, पर कई राज्यों ने आधा लक्ष्य भी पूरा नहीं किया है। आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, मणिपुर, नागालैंड और यूपी सबसे निचले पायदान पर हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन बुधवार को टीबी पर वार्षिक रिपोर्ट 2020 पेश करेंगे।
इस रिपोर्ट में राज्यों की स्थिति भी सामने आएगी। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य लेकर मुहिम शुरू की थी। 2019 में राज्यों को 28.71 लाख मरीजों की पहचान का लक्ष्य मिला था।
राज्यों ने बेहतर प्रदर्शन दिखाते हुए 84 फीसदी (24.07 लाख) से भी अधिक मरीजों की पहचान की और इलाज किया। इसमें 6.81 लाख से अधिक मरीजों की पहचान प्राइवेट अस्पतालों में हुई थी। जोकि वर्ष 2018 की तुलना में डेढ़ लाख से अधिक है। वर्ष 2018 में 21 में से 5.07 लाख मरीजों की पुष्टि प्राइवेट अस्पतालों में हुई थी।
स्टॉप टीबी पाटर्नरशिप कार्यक्रम के अनुसार भारत में रोज औसतन 1230 लोगों की टीबी से मौत हो रही है। 7370 लोग टीबी की चपेट में आ रहे हैं। इसकी कोरोना से तुलना करें तो रोजाना औसतन 97 की संक्रमण से मौत हो रही है, 3,046 मरीज मिल रहे हैं।
1 जून में रोज 300 से अधिक की कोरोना से मौत हो रही हैं। जबकि 10 हजार से अधिक मरीज मिल रहे हैं। एम्स के डॉ. करण का कहना है कि कोरोना के चलते टीबी उपचार प्रभावित हुआ है। इसके पॉजिटिव या निगेटिव परिणाम आगामी दिनों में ही दिखाई देंगे।
फाउंडेशन ऑफ मेडिकल रिसर्च की निदेशक डॉ. नर्गिस मिस्त्री का कहना है, मजदूरों के पलायन का असर भी इस पर पड़ा है। स्थिति वापस पटरी पर लाने में कुछ समय लग सकता है। दिल्ली के राजन बाबू टीबी अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अहमद बताते हैं कि कोरोना और लॉकडाउन के चलते टीबी मरीजों की संख्या गिरी है।
टीबी के उपचार में रुकावट आने से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में टीबी रोग से पीडि़त मरीज गंभीर स्थिति में अस्पतालों में दिखाई दे सकते हैं।
सालाना सबसे अधिक मरीज वाले यूपी में इस वर्ष छह लाख मरीजों का पता लगाने का लक्ष्य है। जून तक तीन लाख मरीजों के मुकाबले 52 फीसदी मरीजों की पहचान हो पाई है। केंद्र के अनुसार यूपी में 38 फीसदी, उत्तराखंड में 30, पश्चिम बंगाल में 37, तमिलनाडु में 39, पंजाब 27, मध्यप्रदेश 35, महाराष्ट्र 38, लद्दाख 43, चंडीगढ़ व आंध्र 40-40 फीसदी प्रभावित हैं। वहीं, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, अस्पतालों में ओपीडी न चलने और स्वास्थ्य कर्मचारियों के कोविड में व्यस्त होने से मार्च से अप्रैल के बीच स्थिति काफी चिंताजनक थी।
गत जनवरी में देश में 1,96,046 टीबी मरीज पंजीकृत हुए। इनमें से 57,676 मरीजों की पहचान निजी अस्पतालों में हुई। इसके बाद कोरोना से अप्रैल में मरीजों की 50 फीसदी कमी देखने को मिली। अप्रैल में 75,184 टीबी रोगियों की पहचान हुई है, जिसमें केवल 15,112 मरीज प्राइवेट अस्पतालों में पंजीकृत हुए।