रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने शुक्रवार को नासिक में एक नई उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया ताकि स्वदेश में विकसित हल्के लड़ाकू विमान तेजस के निर्माण में तेजी लाई जा सके। यह विमान बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा स्थापित तीसरी इकाई है।
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एचएएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सीबी अनंतकृष्णन ने कहा कि नई इकाई से तेजस (एमके1ए) की मौजूदा 16 जेट की क्षमता से 24 जेट सालाना की क्षमता हासिल होगी। एचएएल के पास एलसीए तेजस के लिए बंगलूरू में दो उत्पादन केंद्र हैं। तेजस एकल इंजन वाला बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसे उच्च चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालित किया जा सकता है। तेजस जेट के लिए नई उत्पादन सुविधा की स्थापना कई देशों द्वारा विमान हासिल करने के लिए बढ़ती दिलचस्पी के बीच हुई। दरअसल, मिस्र, अर्जेटिना, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और फीलिपीन ने भी तेजस एयरक्राफ्ट को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर की है।
इस मौके पर एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सीबी अनंतकृष्णन ने कहा कि नई उत्पादन लाइन कंपनी को एलसीए तेजस (एमके1ए) के उत्पादन को 16 जेट की मौजूदा क्षमता से बढ़ाकर 24 विमान प्रति वर्ष करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने बताया कि HAL के पास बेंगलुरु में LCA तेजस के लिए दो निर्माण सुविधाएं हैं।
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इस दौरान रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने भारतीय वायुसेना को 100वां सुखोई-30 एमकेआई आरओएच (रिपेयर एंड ओवरहाल) विमान भी सौंपा। इस दौरान रक्षा सचिव ने तेजस जेट के लिए नई उत्पादन लाइन स्थापित करने के लिए एचएएल की सराहना की और कहा कि एयरोस्पेस प्रमुख देश की सुरक्षा की जरूरतों को पूरा कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' की नीतियों के साथ सामने आई है।
गौरतलब है कि फरवरी 2021 में, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस जेट की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये के सौदे पर मुहर लगा दी।