सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को हरियाणा की पूर्ववर्ती भूपेन्दर सिंह हुड्डा सरकार गुरुग्राम की करीब 1400 एकड़ भूमि अधिग्रहण की चल रही जांच पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का वक्त दिया है।
जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ केसमक्ष सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का वक्त मांगा। जिसकी पीठ ने इजाजत दे दी।
मालूम हो गत दो दिसंबर को हुई पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच की धीमी रफ्तार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह सीबीआई की अफसोसजनक कार्यप्रणाली को दर्शाता है। तत्कालीन हुड्डा सरकार पर आरोप है कि वर्ष 2009 में हुए इस भूमि अधिग्रहण का मकसद बिल्डरों व कॉलोनी बसाने वालों को फायदा पहुंचना था।
नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई को छह महीने के भीतर इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को यह जांच करने के लिए कहा था कि आखिर जब 1400 एकड़ भूमि केअधिग्रहण प्रस्तावित था तो केवल 87 एकड़ जमीन का ही वास्तविक रूप से अधिग्रहण क्यों हुआ और बाकी जमीनें बिल्डरों और कॉलोनी बसाने वालों को क्यों बेच दी गईं।
पिछली सुनवाई में पीठ ने यह भी कहा था अगर अदालत की निगरानी में चल रही जांच की यह स्थिति है तो सीबीआई द्वारा की जा रही अन्य मामलों की जांच का क्या होगा। पीठ ने सीबीआई निदेशक को निजी तौर पर इस मामले का गौर करने के लिए कहा था। पीठ ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि मुनासिब समय के भीतर जांच का काम पूरा हो।