असम के तिनसुकिया जिले के खेरोनिबाड़ी में गुरुवार को बंदूकधारियों आतंकियों ने पांच लोगों की हत्या कर दी थी। यह घटना गुरुवार शाम के 7.20 बजे की है। यहां 6 लोग मोटरसाइकिल में बिसोनीमुख गांव में सेना की वर्दी में राइफल लेकर पहुंचे। उन्होंने बंगाली बोलने वाले 6 लोगों को अपने साथ चलने के लिए कहा। तीन लोगों को एक घर से, दो को मुख्य सड़क से और एक को दुकान से पकड़ा। इसके बाद उन्हें ब्रह्मपुत्र नदी के पास बने पुल पर लेकर गए और पीछे से गोलियां मार दीं।
सादिया के पुलिस अधीक्षक पी एस चांगमाई ने कहा, 'घटनास्थल से लगभग 38 खाली एके-47 कार्टरेज मिले हैं। इस हमले में पांच लोगों की मौत हो गई। छठवां 17 साल का शादब नमाशुद्र नदी में गिर गया था और बंदूकधारियों ने उसे वहीं मरने के लिए छोड़ दिया।' पीड़ितों की पहचान 60 साल के श्यामलाल बिस्वास, 18 साल के अनंत बिस्वास, 25 साल के अभिनाश बिस्वास, 60 साल के सुबल दास और 23 साल के धनंजय नमाशुद्र के तौर पर हुई है।
मारे गए पांचो शख्स मूलत: सब्जियां उगाने वाले किसान थे। हालांकि श्यामलाल सब्जियों का स्टोर और अभिनाश एक मोबाइल रिचार्ज की दुकान चलाता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस हमले में आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट असोम (उल्फा) का हाथ है। हालांकि शुक्रवार को
उल्फा ने इससे इंकार किया है। शादब के अलावा इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी अभिनाश की पत्नी उर्मिला, छोटा भाई सुशेन और बिस्बास के घर आई महिला जुनमोनी सोलोवाल नायक हैं।
नायक के अनुसार, 'चार लोग घर में घुसे, अनंत और शादब से कहा कि उनके पीछे आएं। उन लोगों ने आसामी में बात की और कहा कि उन्हें कुछ बात करनी है। उन्होंने कहा कि बात करने के बाद उन्हें वापस जाने दिया जाएगा। सभी को लगा कि वह सेना के जवान हैं क्योंकि उन्होंने
सेना के कपड़े पहने हुए थे।' उर्मिला नायक और सुशेन उन लोगों के पीछे भागे। नायक ने कहा, 'उन्होंने हमें अपनी बंदूक से मारने की धमकी दी। उन्होंने कहा वापस जाओ। हम डर के मारे वापस घर आ गए।'
तीनों ने घर आकर अभिनाश और अनंत के पिता मोहनलाल को उठाया। उन्होंने घटना को याद करते हुए कहा, 'मैंने अपनी टॉर्च निकाली और गेट की तरफ भागा लेकिन मुझे वहां कोई दिखाई नहीं दिया। वह शायद पुल पर पहुंच गए थे। कुछ मिनट बाद हमने पटाखों की तरह तेज आवाजें सुनीं।' 1 नवंबर को हुई इस घटना के विरोध में बहुत सी बंगाली संस्थाओं ने 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है।