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Manipur: मणिपुर में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़, एक घंटे तक कई राउंड हुई फायरिंग

Fri, 06 Dec 2024 09:21 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल

सार

उग्रवादियों ने शांतिखोंगबल, यिंगांगपोकपी उयोक चिंग और थम्नापोकपी उयोक चिंग गांवों में गोलीबारी की। पुलिस ने बताया कि उनको भगाने के लिए सुरक्षा बलों ने हवा में कुछ राउंड गोलियां चलाईं।
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मणिपुर में सेना (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच गुरुवार रात को मुठभेड़ हुई। इस दौरान करीब एक घंटे तक कई राउंड फायरिंग हुई। हालांकि फायरिंग में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बताया जाता है कि उग्रवादियों ने शांतिखोंगबल, यिंगांगपोकपी उयोक चिंग और थम्नापोकपी उयोक चिंग गांवों में गोलीबारी की। पुलिस ने बताया कि उनको भगाने के लिए सुरक्षा बलों ने हवा में कुछ राउंड गोलियां चलाईं।
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जिरीबाम की घटना के बाद हालात अधिक नाजुक, केंद्र सरकार ने भेजे अतिरिक्त सुरक्षाबल
मणिपुर में बीते साल मई से जातीय हिंसा चल रही है, जिसमें अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए दिन हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। इस माह की शुरुआत में जिरीबाम में तीन महिलाओं और उनके तीन बच्चों की हत्या के बाद हालात अधिक संवेदनशील हो गए हैं। मणिपुर की नाजुक स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य में पांच हजार अतिरिक्त केंद्रीय बल के जवान भेजे हैं।

मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा गया
हिंसा और अशांति की खबरों के बीच मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा, 'हमने यह पत्र राज्य के लोगों की ओर से सौंपा है। इस ज्ञापन में हमने प्रधानमंत्री मोदी से कम से कम एक बार मणिपुर आने का अनुरोध किया है। मणिपुर के लोगों की यही एकमात्र मांग है। हिंसा प्रभावित राज्य के सभी राजनीतिक दलों, यहां तक कि भाजपा की भी यही मांग है।'
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संसद तक सुनी जा रही है गूंज, कांग्रेस सांसद ने लोकसभा में उठाई आवाज
पूर्वोत्तर भारतीय प्रदेश मणिपुर की नाजुक परिस्थितियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के मुद्दे की गूंज संसद तक सुनी जा रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा में स्थगन नोटिस दिया था। उन्होंने 18 महीने से अधिक समय से चल रहा यह संघर्ष और व्यापक हिंसा का जिक्र कर कहा कि विस्थापन और आर्थिक तबाही अब गंभीर मानवीय संकट में बदल चुका है। जातीय आधार पर विभाजन की खाई चौड़ी हो रही है। दोनों पक्ष हथियारों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद के मुताबिक राज्य सरकार शांति बहाल करने में विफल रही है। केंद्र सरकार पर उदासीन होने का आरोप लगाते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि इस मुद्दे का तत्काल संज्ञान लेने और इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है।

18 महीने से अधिक समय से जारी है टकराव
गौरतलब है कि पिछले साल 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़क उठी थी। ऑल ट्राइबल्स स्टूडेंट्स यूनियन (ATSU) ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल करने की मांग के विरोध में रैली आयोजित की थी। इसी दौरान झड़पें हुईं जो बीते करीब 18 महीने में दो समूहों के गंभीर टकराव में बदल चुकी है।
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