दक्षिण भारत के केरल राज्य के लोग 1970 के दशक से ही धनी खाड़ी देशों में नौकरी की तलाश में जाते रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में इस वक्त करीब 20 लाख केरल के लोग रह रहे हैं। जिनमें मुख्य रूप से मध्यम आयु के मुस्लिम पुरुष हैं।
केरल के बड़ी संख्या में रह रहे ये लोग वित्तीय योगदान में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं इन पुरुषों की पत्नी केरल के अपने घरों में ही रहती हैं। वह अपने पति के साथ नहीं जातीं। इन महिलाओं को गल्फ वाइफ कहा जाता है। इनके पति तीन साल में एक बार ही इनसे मिलने आ पाते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 80 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो अपने पति से मिलने इन खाड़ी देशों की यात्रा नहीं कर पातीं। कुछ दशक पहले तक दुबई के पांच सितारा होटल में काम करना भी केरल के लोगों को आकर्षित कर रहा था। उन्हें यहां रोजगार मिल रहा था। ये प्रवासी इन खाड़ी देशों में रहते हुए अपने परिवार को पैसे भेजते हैं, जिनसे इनका खर्चा अच्छा खासा चलता है।
एक आंकड़े के मुताबिक 1.215 करोड़ डॉलर विदेशी धन मार्च 2017 से मार्च 2018 के बीच केरल भेजा गया है। राज्य के मलप्पुरम जिले के करीब एक तिहाई परिवारों का इससे खर्चा चलता है। हालांकि 2014 के बाद से जब यहां तेल के दामों में कमी आई, तब से बेहद कम मात्रा में ही केरल के लोग यहां रहने आए हैं।
इसके अलावा वह वहां के आर्थिक हालातों से भी हतोत्साहित हुए हैं। सऊदी अरब में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां विदेशियों के काम करने पर पाबंदी है। एक राष्ट्रीय योजना के तहत ये पाबंदियां लगाई गई हैं। ताकि देश के निवासियों को बेरोजगार ना रहना पड़े।
एक सर्वे के मुताबिक खाड़ी देशों से प्रवासी अब अपने मूल स्थान की ओर लौटने लगे हैं। 2017 की शुरुआत से 2018 की तीसरी तिमाही तक 11 लाख प्रवासी सऊदी अरब छोड़ चुके हैं। वहीं केरल में 2013 से 2018 तक 3 करीब लाख लोग खाड़ी देशों से वापस लौट चुके हैं। अब खाड़ी देश जाने का लोगों का सपना फीका पड़ता जा रहा है।